अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बड़ी खबर दी है कि ईरान के साथ चल रहा विवाद अब बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। पिछले तीन महीनों से जारी इस तनाव के बीच अब शांति की उम्मीद जगी है। ईरान सरकार फिलहाल अमेरिका की तरफ से आए शांति प्रस्ताव पर विचार कर रही है ताकि युद्ध को रोका जा सके।

📰: Strait of Hormuz पर बड़ा फैसला, Trump और Xi Jinping ने कहा अब नहीं लगेगा कोई टैक्स, ईरान की बढ़ी मुश्किल

क्या अमेरिका और ईरान के बीच डील होने वाली है?

राष्ट्रपति Trump ने संकेत दिया है कि वह ईरान के जवाब का इंतज़ार करेंगे और इसके लिए उन्होंने कुछ दिनों का समय दिया है। ट्रंप ने ईरान के बातचीत करने वाले अधिकारियों के काम की तारीफ भी की है। हालांकि, उन्होंने साफ़ किया है कि अगर सही जवाब नहीं मिले, तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है। इस पूरी बातचीत में Pakistan एक मध्यस्थ (mediator) की भूमिका निभा रहा है।

समुद्री नाकाबंदी और परमाणु हथियारों का क्या मामला है?

एक तरफ बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 94 जहाजों का रास्ता बदला गया और 4 जहाजों को काम करने से रोका गया। परमाणु मुद्दे पर ईरान के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने निर्देश दिया है कि यूरेनियम ईरान के अंदर ही रहेगा, लेकिन IAEA की निगरानी में इसे कम करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।

Gulf देशों और अमेरिकी संसद का क्या कहना है?

  • Gulf देशों का दबाव: Saudi Arabia, Qatar और UAE जैसे देशों ने ट्रंप से अपील की थी कि वह सैन्य हमला टाल दें ताकि बातचीत हो सके। इसी वजह से ट्रंप ने हमले को आगे बढ़ाया।
  • अमेरिकी संसद का एक्शन: अमेरिका की House of Representatives में आज एक वोट होना है, जिसमें ट्रंप को इस युद्ध से बाहर निकालने के लिए कानून लाया जा सकता है।
  • ईरान की चेतावनी: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर उन पर हमला हुआ तो यह क्षेत्रीय युद्ध पूरे इलाके में फैल सकता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान और अमेरिका के बीच विवाद कितने समय से चल रहा है?

यह विवाद लगभग तीन महीने से चल रहा है और अब दोनों देश शांति प्रस्तावों पर चर्चा कर रहे हैं।

क्या Gulf देशों ने इस युद्ध को रोकने में मदद की?

हाँ, सऊदी अरब, कतर और यूएई ने राष्ट्रपति ट्रंप से सैन्य हमला रोकने की अपील की थी ताकि शांति वार्ता को मौका मिले।