Trump Warning to Iran: ट्रंप ने युद्धपोतों को हथियारों से लैस करने का दिया आदेश, बोले समझौता नहीं हुआ तो शुरू होगा युद्ध
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी ने एक बार फिर पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया है कि अमेरिकी नौसेना के जहाजों को सबसे आधुनिक हथियारों और गोला-बारूद से भरा जा रहा है। ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान के साथ चल रही बातचीत में कोई हल नहीं निकला, तो युद्ध दोबारा शुरू किया जा सकता है। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और व्यापार के लिए यह स्थिति काफी गंभीर है क्योंकि इससे समुद्री रास्तों पर असर पड़ सकता है।
ट्रंप ने ईरान को लेकर क्या बड़ी चेतावनी दी है?
ट्रंप ने साफ तौर पर कहा है कि अमेरिकी सेना और हथियार उस समय तक इस क्षेत्र में रहेंगे जब तक कोई पक्का और बड़ा शांति समझौता नहीं हो जाता। उन्होंने ईरान के व्यवहार को गलत बताया और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाले तेल के व्यापार पर सवाल उठाए। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि वहां से गुजरने वाले जहाजों से जो फीस वसूली जा रही है, वह तुरंत रुकनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि इस पूरी बातचीत का नतीजा अगले 24 घंटों में सबके सामने आ जाएगा। अगर ईरान शर्तों को नहीं मानता है तो अमेरिका कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा।
शांति वार्ता को लेकर क्या है अभी की ताजा स्थिति?
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव के अनुसार, उपराष्ट्रपति JD Vance इस समय पाकिस्तान के दौरे पर हैं जहां वे ईरान के साथ बातचीत करेंगे। वाशिंगटन का कहना है कि वे सकारात्मक सोच के साथ मेज पर आ रहे हैं लेकिन अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे। फिलहाल जो दो हफ्ते का युद्धविराम चल रहा है, उसे काफी कमजोर माना जा रहा है। इस पूरी स्थिति के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखना अमेरिका की मुख्य शर्त है।
- ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि शांति बनाए रखने के लिए समुद्री रास्ता खुलना जरूरी है।
- ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका और इसराइल के हमले रुकते हैं, तो वे अपनी रक्षात्मक कार्रवाई बंद कर देंगे।
- इसराइल अभी भी लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला के खिलाफ ऑपरेशन चला रहा है।
सऊदी और अन्य खाड़ी देशों की नजर इस समझौते पर टिकी हुई है। अगर यह बातचीत फेल होती है, तो तेल की कीमतों और जहाजों की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ सकता है, जिससे भारत और अन्य देशों से आने वाले प्रवासियों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।




