अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता टूटने के बाद तनाव काफी बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिकी नौसेना हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की नाकेबंदी कर सकती है। यह कदम उन जहाजों के लिए होगा जो इस रास्ते से अंदर आने या बाहर जाने की कोशिश करेंगे। इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मच गई है।

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शांति वार्ता क्यों हुई नाकाम और अब क्या होगा?

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच करीब 21 घंटे तक बातचीत चली लेकिन कोई समझौता नहीं हो पाया। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने किया था। उन्होंने बताया कि ईरान ने अमेरिका की शर्तें नहीं मानीं और इसे ईरान के लिए बुरी खबर बताया। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने Truth Social पर एक लेख साझा किया जिसमें इस समुद्री रास्ते की नाकेबंदी करने के विकल्प पर चर्चा की गई है।

नौसेना की तैयारी और ईरान की चेतावनी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 11 अप्रैल 2026 को ही इस रास्ते से समुद्री बारूद (sea mines) हटाने का काम शुरू कर दिया था। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति के आने वाले किसी भी सैन्य जहाज के साथ सख्ती से निपटा जाएगा। ईरान का दावा है कि यह पूरा रास्ता उनके नियंत्रण में है और यहाँ से गुजरने के लिए ईरानी रियाल में टोल देना होगा।

जहाज का नाम भूमिका / स्थिति
USS Gerald Ford और USS Abraham Lincoln पर्सियन गल्फ में तैनात
USS Frank E. Peterson और USS Michael Murphy समुद्री बारूद हटाने के ऑपरेशन में शामिल

सऊदी अरब का रुख और आम लोगों पर असर

सऊदी अरब ने मांग की है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बिना किसी रोक-टोक के सभी जहाजों के लिए खुला रखा जाए। सऊदी ने इसे 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून के हिसाब से चलाने की बात कही है। अगर इस रास्ते पर नाकेबंदी होती है, तो तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ेगा। इससे दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं और खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों के लिए आर्थिक स्थितियां प्रभावित हो सकती हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.