अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों से यूरेनियम सुरक्षित करने के लिए अमेरिकी सैनिकों को भेजने की खबरों पर अपनी स्थिति साफ की है। New York Post को दिए एक फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वह फिलहाल ईरान में ज़मीनी सेना भेजने का फैसला लेने के करीब नहीं हैं। यह बयान उनके पिछले रुख से थोड़ा अलग है जहाँ उन्होंने एयर फ़ोर्स वन पर चर्चा के दौरान इस विचार पर गौर करने की बात कही थी।

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Operation Epic Fury और सैन्य अभियान की ताज़ा स्थिति क्या है?

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि ‘Operation Epic Fury’ नाम से चल रहा सैन्य अभियान बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह ऑपरेशन उनकी शुरुआती 4-5 हफ्तों की योजना से काफी आगे चल रहा है। ट्रंप के अनुसार अमेरिकी हमलों में ईरान की नौसेना, वायुसेना और संचार व्यवस्था पूरी तरह तबाह हो गई है। हालांकि, यूरेनियम को ज़ब्त करने के लिए सैनिकों को ज़मीन पर उतारने को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस समय Isfahan परमाणु सुविधा केंद्र पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है जहाँ यूरेनियम के संभावित मूवमेंट के संकेत मिले हैं।

इस तनाव का अंतरराष्ट्रीय बाज़ार और आम जनता पर क्या असर हुआ?

विषय महत्वपूर्ण अपडेट
कच्चा तेल ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं।
भारत का पक्ष विदेश मंत्री S. Jaishankar ने तनाव कम करने और बातचीत का रास्ता अपनाने की वकालत की है।
परमाणु निगरानी IAEA ने जानकारी दी है कि वह पिछले 9 महीनों से ईरान के यूरेनियम की सही लोकेशन नहीं देख पा रही है।
आर्थिक प्रभाव ईरान के विदेश मंत्री के अनुसार इस युद्ध की वजह से गैस के दाम और होम लोन की दरें महंगी हो गई हैं।

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ रहे इस तनाव का असर वहां रहने वाले भारतीयों और प्रवासियों पर भी देखने को मिल रहा है। तेल की बढ़ती कीमतों और अनिश्चितता के माहौल से बाज़ार में हलचल तेज़ है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप प्रशासन ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा। दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी कहा है कि उनका देश किसी भी दबाव के आगे आसानी से नहीं झुकेगा।