Trump का बड़ा ऐलान, Iran से व्यापार करने वाले देशों पर लगेगा 25% टैक्स, UAE और China भी लपेटे में
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बड़ा फैसला लेते हुए एक नए आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। इस आदेश के मुताबिक, जो भी देश Iran के साथ व्यापार करेंगे, उन पर अमेरिका 25% तक का अतिरिक्त टैक्स लगा सकता है। यह फैसला 7 फरवरी 2026 से प्रभावी हो गया है और इसका सीधा असर China, UAE और Türkiye जैसे देशों पर पड़ने वाला है। अमेरिका ने यह कदम अपनी ‘America First’ नीति को आगे बढ़ाते हुए उठाया है।
क्या है यह नया टैक्स नियम?
इस आदेश का मुख्य मकसद Iran की आर्थिक मदद को रोकना है। नए नियम के तहत, अगर कोई देश Iran से सामान खरीदता है या वहां अपनी सेवाएं देता है, तो उस देश से अमेरिका आने वाले सामान पर 25% तक की कस्टम ड्यूटी लगाई जाएगी। यह टैक्स अपने आप नहीं लगेगा, बल्कि इसकी एक प्रक्रिया तय की गई है।
अमेरिका के Secretary of Commerce उन देशों की पहचान करेंगे जो इस नियम को तोड़ रहे हैं। इसके बाद Secretary of State (Marco Rubio) यह तय करेंगे कि किस देश पर कितना टैक्स लगाना है। इसे लागू करने के लिए अमेरिका ने अपने पुराने कानूनों का सहारा लिया है।
किन देशों पर होगा सबसे ज्यादा असर?
इस फैसले का सबसे बड़ा असर उन देशों पर होगा जो Iran के साथ भारी मात्रा में लेन-देन करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, China इस लिस्ट में सबसे ऊपर है क्योंकि वह Iran के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। इसके अलावा कई और देश भी अमेरिका की रडार पर हैं।
प्रमुख देशों का व्यापारिक आंकड़ा इस प्रकार है:
- China: करीब $17.8 बिलियन का व्यापार (2024 में)।
- UAE: दूसरा सबसे बड़ा पार्टनर, करीब $16.1 बिलियन का व्यापार।
- Türkiye: तीसरा बड़ा पार्टनर, करीब $8.8 बिलियन का व्यापार।
- अन्य देश: Russia, Iraq, Germany और India का नाम भी चर्चा में है।
बाज़ार में मची खलबली और प्रतिक्रिया
इस आदेश के साइन होते ही कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला है। बाज़ार को डर है कि इससे तेल की सप्लाई में कमी आ सकती है। साथ ही, जहाजों के इंश्योरेंस का खर्चा भी बढ़ गया है। यह फैसला Muscat, Oman में अमेरिका और Iran के बीच हुई बातचीत के बेनतीजा रहने के ठीक बाद आया है।
China ने इस कदम को दादागिरी बताया है और कहा है कि वह अपने हितों की रक्षा करेगा। वहीं, Türkiye भी हालात पर नज़र बनाए हुए है क्योंकि उनका अमेरिका के साथ $32 बिलियन का व्यापार है। अमेरिका का कहना है कि यह फैसला अंतिम है और इसका मकसद Iran को मिलने वाले पैसे को रोकना है।




