अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने व्हाइट हाउस से देश को संबोधित करते हुए मिडिल ईस्ट के अपने सहयोगी देशों का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने साफ कहा कि वह Israel, Saudi Arabia, Qatar, UAE, Kuwait और Bahrain को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने देंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में ईरान के साथ तनाव चरम पर है। ट्रंप ने इन देशों को भरोसा दिया है कि अमेरिका उनके साथ मजबूती से खड़ा है और किसी भी स्थिति में उन्हें अकेला नहीं छोड़ेगा।

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ट्रंप ने ईरान को लेकर क्या बड़े दावे किए?

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर तेल टैंकरों और पड़ोसी देशों पर हमले करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ईरान के इन हमलों की वजह से ही दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं। ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका मिडिल ईस्ट के तेल पर निर्भर नहीं है, लेकिन वह अपने सहयोगियों की मदद के लिए वहां मौजूद है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो ईरान के बिजली घरों पर हमला किया जा सकता है।

  • ट्रंप के अनुसार ईरान ने अमेरिका से युद्धविराम की गुजारिश की है
  • Strait of Hormuz खुलने के बाद ही इस पर विचार किया जाएगा
  • आने वाले हफ्तों में अमेरिका ईरान पर बड़ी कार्रवाई कर सकता है
  • ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का नया नेतृत्व पहले के मुकाबले कम कट्टर है

खाड़ी देशों और NATO के बीच कैसा है माहौल?

इस पूरे संघर्ष में अलग-अलग देशों का नजरिया अलग रहा है। ट्रंप ने अपने संबोधन में NATO देशों की आलोचना की क्योंकि उन्होंने ईरान के मामले में अमेरिका का साथ देने से मना कर दिया। Secretary of State Marco Rubio ने भी ट्रंप के इस भाषण को बेहद शक्तिशाली बताया है और वह भी NATO की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। विभिन्न देशों के स्टैंड को इस प्रकार समझा जा सकता है:

देश/संगठन मौजूदा रुख
Saudi Arabia, UAE, Kuwait, Bahrain चाहते हैं कि ईरान के खिलाफ युद्ध तब तक चले जब तक वह कमजोर न हो जाए
UAE खास तौर पर ईरान में जमीनी सैन्य कार्रवाई के पक्ष में है
Qatar और Oman हमेशा से बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान चाहते हैं
European Union युद्ध को तुरंत रोकने और बातचीत की मेज पर लौटने की अपील कर रहे हैं