US President Donald Trump ने ईरान के खार्ग द्वीप पर किए गए हालिया हमलों के बाद एक और बड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि अमेरिका आने वाले दिनों में खार्ग द्वीप पर और भी हमले कर सकता है. इस तनाव के बीच खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, UAE, कतर और ओमान में रहने वाले भारतीयों की चिंता बढ़ गई है. हालात को देखते हुए CBSE ने इन देशों में होने वाली 12वीं की बोर्ड परीक्षा भी रद्द कर दी है.
ईरान के खार्ग द्वीप पर क्या हुआ है?
अमेरिका के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 13 मार्च 2026 को ईरान के खार्ग द्वीप पर 90 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर बड़ा हमला किया. Trump के अनुसार अमेरिकी हमलों में ईरान का सैन्य ढांचा पूरी तरह से तबाह हो गया है. उन्होंने कहा कि तेल पाइपलाइन और टर्मिनल्स को अभी जानबूझकर छोड़ दिया गया है ताकि उन्हें दोबारा बनाने में सालों का वक्त न लगे.
उन्होंने आगे बताया कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रोकी गई तो तेल के ठिकानों पर भी हमला करने पर विचार किया जाएगा. खार्ग द्वीप ईरान का सबसे अहम तेल केंद्र है जहां से उसके लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है.
गल्फ देशों में रहने वाले भारतीयों पर क्या असर पड़ेगा?
इस युद्ध के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और उनके परिवारों पर सीधा असर पड़ रहा है. तनाव को देखते हुए CBSE ने बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और UAE में 16 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच होने वाली कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाएं रद्द कर दी हैं. इससे वहां रहने वाले हजारों भारतीय छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है.
ईरान के IRGC ने UAE के तीन बड़े बंदरगाहों के लिए चेतावनी जारी की थी और दावा किया था कि अमेरिका ने हमले के लिए UAE की सुविधाओं का इस्तेमाल किया. हालांकि UAE ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. इसके अलावा अमेरिका ने इराक में मौजूद अपने सभी नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने का आदेश दिया है.
युद्ध में अब तक कितना नुकसान हुआ है?
28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस सैन्य अभियान के बाद से अब तक मरने वालों की संख्या 2000 को पार कर गई है. ईरान के इस्फहान में एक फैक्ट्री पर हुए अलग हमले में कम से कम 15 लोग मारे गए हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ऊर्जा सुविधाओं पर होने वाले किसी भी हमले का जवाब देने की कसम खाई है.
Trump ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और UK जैसे देशों से भी अपने युद्धपोत तैनात करने की अपील की है. उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान समझौते के लिए तैयार दिख रहा है लेकिन वर्तमान शर्तें अभी उनके लिए काफी नहीं हैं.
