मध्य पूर्व में युद्ध रोकने के लिए तुर्की की बड़ी पहल, हकान फिदान ने अमेरिका, ईरान और अरब देशों से की बात
तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए बड़ी कूटनीतिक कोशिश शुरू की है। फिदान ने ईरान, मिस्र, अमेरिका और यूरोपीय संघ के अधिकारियों से फोन पर लंबी चर्चा की है। यह कोशिश ऐसे समय में हो रही है जब खाड़ी देशों में युद्ध फैलने और बिजली घरों पर हमलों की धमकियां दी जा रही हैं। इस युद्ध का असर खाड़ी में रह रहे लाखों भारतीयों और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
ईरान और अमेरिका के बीच क्या है तनाव की बड़ी वजह?
ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर कलिबाफ ने चेतावनी दी है कि अगर उनके पावर प्लांट पर हमला हुआ तो वे पूरे मध्य पूर्व में बिजली और ऊर्जा केंद्रों को तबाह कर देंगे। इससे दुनिया भर में तेल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ सकती हैं। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी सख्त रुख अपनाया है और होर्मुज के रास्ते को 48 घंटे के भीतर खुला रखने की बात कही है। इस तनाव की वजह से पूरे इलाके में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी परमाणु केंद्रों के पास हमलों पर चिंता जताई है।
खाड़ी देशों और आम जनता पर क्या होगा इसका असर?
सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों ने साफ किया है कि वे अपनी जमीन या आसमान का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी हमले के लिए नहीं होने देंगे। हालांकि वे इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर युद्ध और कुछ हफ्ते चला तो उन्हें भी मजबूरन कोई कदम उठाना पड़ सकता है। खाड़ी में काम करने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि तेल की सप्लाई रुकने और समुद्री रास्ते बंद होने से सीधा असर रोजगार और महंगाई पर पड़ता है। इस विवाद में शामिल मुख्य पक्षों का विवरण नीचे दिया गया है:
| देश/संस्था | मुख्य प्रतिनिधि | भूमिका |
|---|---|---|
| तुर्की | हकान फिदान | मध्यस्थता की कोशिश |
| ईरान | अब्बास अराक्ची | जवाबी कार्रवाई की चेतावनी |
| यूरोपीय संघ | काजा क्लास | शांति चर्चा में शामिल |
| मिस्र | बद्र अब्देलाती | क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा |
| WHO | टेड्रोस घेब्रेयेसस | परमाणु सुरक्षा की अपील |




