UAE Ambassador on Iran: यूएई राजदूत का बड़ा बयान, सिर्फ युद्धविराम काफी नहीं, ईरान के खतरों का चाहिए स्थायी समाधान
अमेरिका में यूएई के राजदूत Yousef Al Otaiba ने ईरान के साथ चल रहे मौजूदा तनाव पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने द वॉल स्ट्रीट जर्नल (The Wall Street Journal) में लिखे अपने लेख में स्पष्ट किया है कि वर्तमान स्थिति में केवल सीज़फायर (युद्धविराम) कर देना पर्याप्त नहीं होगा। ओतैबा के अनुसार, यह युद्ध केवल एक अस्थायी संकट नहीं है बल्कि एक बड़ी परीक्षा है कि ईरान भविष्य में वैश्विक अर्थव्यवस्था को किस तरह प्रभावित करेगा। यूएई का मानना है कि अब समय आ गया है जब ईरान के सभी खतरों का एक ठोस और निर्णायक समाधान निकाला जाए।
यूएई के अनुसार ईरान से किन मुख्य खतरों का सामना करना पड़ रहा है?
राजदूत यूसुफ अल ओतैबा ने अपने लेख में बताया कि यूएई इस संघर्ष में अग्रिम पंक्ति में रहा है। रिपोर्ट के अनुसार ईरान की तरफ से यूएई पर अब तक 2,180 से अधिक मिसाइलें और ड्रोन हमले किए जा चुके हैं। यूएई चाहता है कि किसी भी शांति समझौते में ईरान की इन गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगनी चाहिए। यूएई ने मुख्य रूप से इन खतरों को रेखांकित किया है:
- परमाणु कार्यक्रम: ईरान की परमाणु क्षमताओं को नियंत्रित करना सबसे जरूरी है।
- मिसाइल और ड्रोन: बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों की तकनीक को रोकना।
- आतंकी नेटवर्क: क्षेत्र में सक्रिय आतंकी समूहों (प्रॉक्सी) को मिलने वाली मदद बंद करना।
- समुद्री व्यापार: अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों, विशेषकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावटें खत्म करना।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल सप्लाई पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दबाव बनाने की कोशिशों से पूरी दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के अनुसार, ईरान का यह रुख वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने जैसा है। यदि तनाव बढ़ता है, तो इससे तेल की कीमतें बढ़ेंगी जिससे भारत सहित कई देशों में महंगाई बढ़ सकती है। अमेरिकी प्रशासन भी इस मामले में सक्रिय है और पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव दिया गया है, जिस पर आने वाले समय में चर्चा हो सकती है।




