संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने यमन में अपने 10 साल के सैन्य मिशन को आधिकारिक रूप से खत्म कर दिया है। 29 जनवरी, 2026 को आई ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक अब UAE वहां सिर्फ लोगों की मदद और विकास के कामों पर ध्यान दे रहा है। यमन के लोगों के लिए बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अमीरात ने अपनी तिजोरी खोल दी है और काम शुरू कर दिया है।
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बिजली संकट के लिए 1 अरब डॉलर का फंड
यमन में बिजली की भारी किल्लत को देखते हुए UAE ने एक बड़ा कदम उठाया है। नवंबर 2025 में वहां के ऊर्जा संकट को दूर करने के लिए 1 अरब डॉलर का विशेष फंड अलग रखा गया है। इसका मुख्य काम अदन और शबवा में सौर और पवन ऊर्जा के बड़े प्लांट लगाना है ताकि लोगों के घरों में रौशनी हो सके।
अधिकारियों का कहना है कि इन प्रोजेक्ट्स से करीब 20 से 30 लाख घरों को बिजली मिल पाएगी। इसके अलावा, इन पावर प्लांट के निर्माण और रखरखाव के लिए यमन में ही 6,000 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है, जिससे वहां के युवाओं को काम मिलेगा।
स्कूल और अस्पतालों के लिए क्या है प्लान?
पिछले एक दशक में UAE ने यमन को मदद के तौर पर कुल 8 अरब डॉलर दिए हैं। इसमें से बड़ा हिस्सा विकासात्मक परियोजनाओं पर खर्च हुआ है। हाल ही में किए गए कुछ प्रमुख काम इस प्रकार हैं:
- शिक्षा: अल-धालिया प्रांत में नए शैक्षिक परिसर खोले गए हैं और ‘स्कूल बैग प्रोजेक्ट’ के तहत होदेइदाह और ताइज में 26,000 छात्रों को पढ़ाई का सामान दिया गया।
- स्वास्थ्य: अदन में एक आधुनिक अस्पताल बनाने के लिए वहां के गवर्नर के साथ समझौता हुआ है। अब तक 110 अस्पतालों और क्लीनिकों को सुधारा जा चुका है।
- राहत कार्य: बाढ़ से प्रभावित 960 परिवारों को रहने की जगह और खाना मुहैया कराया गया है। साथ ही 35,000 परिवारों को कपड़े बांटे गए।
मदद पहुंचाने का तरीका बदला
सहायता सही हाथों में पहुंचे, इसके लिए अब नए नियम बनाए गए हैं। UAE की एमिरेट्स रेड क्रिसेंट (ERC) और इंटरनेशनल एड एजेंसी अब सीधे यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) के साथ मिलकर काम कर रही हैं। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर प्रोजेक्ट के लिए स्थानीय गवर्नरों के साथ लिखित समझौते (MoU) किए जा रहे हैं ताकि पैसे का सही इस्तेमाल हो सके।




