UAE का बड़ा बयान: ईरान के साथ समझौते के लिए चाहिए पक्की गारंटी, गर्गाश ने साफ की स्थिति
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गर्गाश ने ईरान के हमलों को लेकर बड़ा बयान दिया है। रविवार, 29 मार्च 2026 को उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों का कोई भी राजनीतिक समाधान तभी संभव है जब भविष्य में फिर से ऐसे हमले न होने की पक्की गारंटी दी जाए। उन्होंने जोर दिया कि शांति के लिए ईरान को पुरानी गलतियों को सुधारना होगा और सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।
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ईरान के हमलों पर UAE की मुख्य मांगें क्या हैं?
अनवर गर्गाश के अनुसार, किसी भी राजनीतिक समझौते में ठोस गारंटियों का होना सबसे जरूरी है। UAE का मानना है कि केवल बातों से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि जमीन पर बदलाव दिखना चाहिए। खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोगों और विशेषकर भारतीय प्रवासियों के लिए सुरक्षा की स्थिति बहुत मायने रखती है क्योंकि इससे रोजगार और व्यापार पर सीधा असर पड़ता है।
- ईरान को भविष्य में किसी भी तरह की आक्रामकता न करने की लिखित गारंटी देनी होगी।
- जिन नागरिक और जरूरी सुविधाओं को हमलों में निशाना बनाया गया है, उनके नुकसान की भरपाई ईरान को करनी होगी।
- क्षेत्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पक्की व्यवस्था बनाना ही एकमात्र रास्ता है।
- UAE अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार है।
हालिया हमलों का क्या असर हुआ और क्या है ताजा स्थिति?
पिछले कुछ हफ्तों में UAE को कई मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है। रविवार सुबह भी UAE के रक्षा मंत्रालय ने ईरान की ओर से आने वाले खतरों को सफलतापूर्वक रास्ते में ही रोक दिया। इन हमलों का असर वहां की बड़ी कंपनियों पर भी पड़ा है जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने भी इन हमलों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया है।
| तारीख | बड़ी घटना |
|---|---|
| 29 मार्च 2026 | गर्गाश ने राजनीतिक समाधान के लिए गारंटी और मुआवजे की मांग की। |
| 28 मार्च 2026 | ईरानी हमलों के कारण Emirates Global Aluminium (EGA) की साइट को नुकसान पहुंचा। |
| 27 मार्च 2026 | UAE ने हमलों का डटकर मुकाबला करने और अपनी सुरक्षा मजबूत करने का संकल्प लिया। |
| 26 मार्च 2026 | संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने ईरान की कार्रवाइयों की निंदा का प्रस्ताव अपनाया। |
UAE सरकार का कहना है कि वह शांति चाहती है लेकिन सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और मिस्र जैसे देश भी स्थिति को संभालने की कोशिशों में जुटे हैं। आम लोगों और प्रवासियों के लिए फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था को और भी ज्यादा सख्त कर दिया गया है।




