Strait of Hormuz को लेकर GCC देशों का बड़ा फैसला, बहरीन के प्रस्ताव को UAE ने दिया साथ.
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने बहरीन के उस प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन किया है जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय यातायात के लिए खुला रखने के लिए लाया गया है। बहरीन के साथ इस मुहिम में GCC के अन्य देश और जॉर्डन भी शामिल हो गए हैं। इस कदम का मुख्य मकसद समुद्र में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना और किसी भी देश के जबरन नियंत्रण को रोकना है। अब इस प्रस्ताव पर शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को वोटिंग होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस नए प्रस्ताव में क्या-क्या नियम शामिल किए गए हैं?
बहरीन ने इस प्रस्ताव को बहुत सोच-समझकर तैयार किया है ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कोई रुकावट न आए। इसमें कुछ प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया गया है जो इस प्रकार हैं:
- स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को बिना किसी देश के नियंत्रण के अंतरराष्ट्रीय पारगमन के लिए खुला रखा जाएगा।
- जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल बचाव वाले कदम उठाने की अनुमति होगी।
- पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाएगी और इसकी जानकारी संयुक्त राष्ट्र को देनी होगी।
- संयुक्त राष्ट्र के महासचिव हर महीने सुरक्षा परिषद को वहां के हालातों की रिपोर्ट देंगे।
समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर चिंता क्यों बढ़ी?
बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुललतीफ बिन राशिद अल-जयानी ने सुरक्षा परिषद को ईरान की ओर से मिल रही धमकियों के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने साफ कहा है कि इन धमकियों से वैश्विक व्यापार पर बुरा असर पड़ सकता है। UAE की मंत्री रीम बिंत इब्राहिम अल हाशमी ने भी एक बैठक में बताया कि व्यापारिक जहाजों पर हमले करना एक तरह से समुद्री डकैती जैसा काम है। हालांकि चीन और रूस जैसे देशों ने सेना के इस्तेमाल को लेकर कुछ आपत्ति जताई थी, जिसके बाद अब इस प्रस्ताव में केवल बचाव वाले सैन्य उपायों की बात कही गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के लिए भी यह रास्ता बहुत जरूरी है क्योंकि इसी रास्ते से तेल और गैस की सप्लाई होती है।




