UAE के बराका न्यूक्लियर एनर्जी प्लांट (Barakah Nuclear Energy Plant) के पास एक ड्रोन हमला हुआ है। इस हमले की वजह से प्लांट के बाहरी इलाके में मौजूद एक बिजली जनरेटर में आग लग गई। इस घटना के बाद से क्षेत्र में सुरक्षा और सैन्य तनाव बढ़ गया है, जबकि ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता रुकी हुई है।

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हमला कैसे हुआ और कितना नुकसान हुआ

UAE के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, देश की सीमा में तीन ड्रोन घुसे थे। सुरक्षा बलों ने दो ड्रोन को सफलतापूर्वक रोक लिया, लेकिन तीसरा ड्रोन पश्चिमी सीमा से आया और प्लांट के बाहरी घेरे में स्थित एक इलेक्ट्रिक जनरेटर से जा टकराया। अबू धाबी मीडिया ऑफिस ने बताया कि आपातकालीन सेवाओं ने तुरंत आग पर काबू पा लिया और इस हादसे में कोई घायल नहीं हुआ है।

परमाणु प्लांट की सुरक्षा और रेडिएशन की स्थिति

फेडरल अथॉरिटी फॉर न्यूक्लियर रेगुलेशन (FANR) ने साफ किया है कि आग का असर प्लांट की सुरक्षा या उसकी मुख्य प्रणालियों पर नहीं पड़ा है। प्लांट के सभी यूनिट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और कोई भी रेडियोएक्टिव पदार्थ बाहर नहीं निकला है। रेडिएशन का स्तर भी सामान्य है, जिससे आम जनता या पर्यावरण को कोई खतरा नहीं है। इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) इस स्थिति पर नजर रख रही है और उसके डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है।

दुनिया भर के देशों की प्रतिक्रिया

  • UAE विदेश मंत्रालय: इसे एक “घिनौना आतंकवादी हमला” और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। मंत्रालय ने कहा कि UAE को ऐसे हमलों का जवाब देने का पूरा हक है।
  • अनवर गरगाश: राष्ट्रपति सलाहकार ने इस हमले के पीछे ईरान या उसके समर्थित समूहों का हाथ बताया है।
  • डोनाल्ड ट्रंप: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि उनके पास समय बहुत कम है और उन्हें जल्द ही कदम उठाने होंगे।
  • सऊदी अरब: सऊदी सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या बराका परमाणु प्लांट के अंदर कोई धमाका हुआ?

नहीं, ड्रोन प्लांट के अंदर नहीं बल्कि बाहरी घेरे में एक बिजली जनरेटर से टकराया था। प्लांट की मुख्य मशीनें और सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित हैं।

क्या इस हमले से रेडिएशन का खतरा बढ़ा है?

FANR और IAEA दोनों ने पुष्टि की है कि रेडिएशन का स्तर सामान्य है और पर्यावरण या लोगों के लिए कोई खतरा नहीं है।