UAE सरकार का बड़ा फैसला, जुलाई 2026 से बदलेगा बिलिंग का तरीका, नहीं मानने पर लगेगा जुर्माना
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सरकार ने व्यापार और टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय (MoF) और Federal Tax Authority (FTA) ने पुष्टि की है कि जुलाई 2026 से देश में इलेक्ट्रॉनिक इनवॉइसिंग सिस्टम (e-invoicing) का पायलट चरण शुरू किया जाएगा। इस नए नियम के तहत पुराने कागज और PDF वाले बिलों की जगह अब रियल-टाइम डिजिटल फॉर्मेट का इस्तेमाल होगा, जिससे VAT नियमों का पालन बेहतर तरीके से हो सकेगा।
कब और कैसे लागू होगा नया नियम?
सरकार ने इस सिस्टम को लागू करने के लिए एक समय सीमा तय की है ताकि व्यापारियों को तैयारी का पूरा मौका मिल सके। यह नियम अलग-अलग चरणों में कंपनियों के रेवेन्यू के आधार पर लागू होगा। नीचे दी गई समय सारिणी से आप समझ सकते हैं कि किस कंपनी के लिए यह नियम कब से अनिवार्य होगा।
| तारीख | किसे शामिल किया जाएगा |
|---|---|
| 1 जुलाई 2026 | पायलट फेज (चुनिंदा कंपनियों के लिए शुरुआत) |
| 1 जनवरी 2027 | 50 मिलियन दिरहम से ज्यादा रेवेन्यू वाली कंपनियों के लिए अनिवार्य |
| 1 जुलाई 2027 | बाकी सभी VAT रजिस्टर्ड कंपनियों के लिए अनिवार्य |
| 1 अक्टूबर 2027 | सरकारी संस्थाओं के लिए अनिवार्य |
नियम तोड़े तो कितना लगेगा जुर्माना
नए नियमों के मुताबिक अब इनवॉइस केवल XML या JSON फॉर्मेट में ही मान्य होंगे। अगर आप अभी तक PDF या पेपर बिल का इस्तेमाल करते हैं, तो टैक्स विभाग इसे स्वीकार नहीं करेगा। इसके अलावा, किसी भी लेनदेन का इनवॉइस 14 दिनों के भीतर सिस्टम पर अपलोड करना जरूरी होगा।
सरकार ने नियमों का पालन न करने वालों के लिए जुर्माने का भी प्रावधान किया है। कैबिनेट के फैसले के अनुसार, e-invoicing की आवश्यकताओं को पूरा न करने पर कंपनियों को 5,000 दिरहम प्रति माह तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। अगर सिस्टम में कोई तकनीकी खराबी आती है, तो उसकी जानकारी FTA को 2 कामकाजी दिनों के अंदर देनी होगी।
कंपनियों को क्या तैयारी करनी होगी
इस नए सिस्टम से जुड़ने के लिए कंपनियों को ‘Accredited Service Providers’ (ASP) की मदद लेनी होगी। ये सर्विस प्रोवाइडर सरकार द्वारा मंजूर किए गए हैं जो कंपनियों और टैक्स विभाग के बीच तकनीकी कड़ी का काम करेंगे। वित्त मंत्रालय का अनुमान है कि इस डिजिटल बदलाव से कंपनियों का बिल बनाने का खर्च समय के साथ 60 से 66 प्रतिशत तक कम हो जाएगा।
कंपनियों को यह भी ध्यान रखना होगा कि सभी इलेक्ट्रॉनिक इनवॉइस और उससे जुड़ा डेटा UAE के अंदर ही स्टोर करना होगा। अभी यह नियम केवल B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) और B2G (बिजनेस-टू-गवर्नमेंट) ट्रांजेक्शन पर लागू है, आम ग्राहकों (B2C) के लिए इसे बाद में लाया जाएगा।





