UAE और भारत के विदेश मंत्रियों ने अबू धाबी में एक अहम बैठक की। इस मुलाकात में ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमलों और उनके असर पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, दुनिया भर में तेल की सप्लाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले खतरों को लेकर चिंता जताई।

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बैठक में किन मुख्य बातों पर चर्चा हुई?

भारत के विदेश मंत्री Dr. S. Jaishankar ने UAE के साथ अपनी पूरी एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि भारत UAE की संप्रभुता और वहां रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा का पूरा समर्थन करता है। बैठक के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि ईरान के हमलों से जहाजों के आवागमन और ग्लोबल नेविगेशन पर बुरा असर पड़ सकता है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

ईरान के हमलों और UAE का आधिकारिक स्टैंड क्या है?

UAE ने ईरान के हमलों को आतंकवादी और बिना उकसावे के किया गया हमला बताया है। UAE के विदेश मंत्रालय के अनुसार, पिछले 40 दिनों में ईरान ने बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। UAE की मांग है कि ईरान इन हमलों के लिए जवाबदेह हो और हुए नुकसान की भरपाई करे।

विवरण जानकारी
हमलों की कुल संख्या 2,819 मिसाइल और ड्रोन
हमलों की अवधि पिछले 40 दिन
UNSC प्रस्ताव प्रस्ताव 2817 (2026)
मुख्य चिंता ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार
भारतीय प्रतिनिधि Dr. Subrahmanyam Jaishankar
UAE प्रतिनिधि Sheikh Abdullah bin Zayed Al Nahyan

सुरक्षा के लिए अब आगे क्या कदम उठाए जाएंगे?

UAE ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का पूरी तरह पालन करने की मांग की है। साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ईरान के साथ किए गए दो हफ्ते के युद्धविराम के ऐलान पर भी नजर रखी जा रही है। भारत भी खाड़ी क्षेत्र के देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि ऊर्जा की सप्लाई में कोई रुकावट न आए और स्थिरता बनी रहे।