UAE की मंत्री रीम अल हाशिमी ने एस जयशंकर से की मुलाकात, ईरान जंग के बीच सुरक्षा पर हुई बड़ी चर्चा
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की अंतरराष्ट्रीय सहयोग मामलों की राज्य मंत्री रीम अल हाशिमी ने 19 मार्च 2026 को नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से खास मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ा हुआ है। बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को लेकर काफी देर तक चर्चा की। इस बातचीत में ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री रास्तों की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को प्राथमिकता दी गई।
कौन हैं रीम अल हाशिमी और भारत के लिए यह बैठक क्यों जरूरी है?
रीम अल हाशिमी यूएई की एक बहुत प्रभावशाली नेता और राजनयिक हैं। वह साल 2016 से ही यूएई सरकार में अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उन्होंने अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी जैसी नामी संस्थाओं से अपनी पढ़ाई पूरी की है। रीम अल हाशिमी को 2020 दुबई एक्सपो के सफल आयोजन का मुख्य चेहरा माना जाता है। भारत और यूएई के बीच रिश्तों को मजबूत करने में उनकी भूमिका काफी अहम रही है।
इस बैठक में खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की सुरक्षा पर बात हुई। यह रास्ता दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई के लिए बहुत जरूरी है। ईरान के हमलों और क्षेत्रीय तनाव की वजह से इस समुद्री रास्ते पर खतरा बढ़ गया है। भारत और यूएई दोनों इस बात पर सहमत हुए कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारू रूप से चलाने के लिए नौवहन की आजादी को बचाना हर हाल में जरूरी है।
भारतीयों की सुरक्षा और बैठक की मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूएई सरकार को वहां रह रहे लाखों भारतीयों का ख्याल रखने के लिए धन्यवाद दिया। जंग के माहौल में खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई। बैठक के कुछ मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- समुद्री सुरक्षा: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया।
- मिसाइल हमलों का असर: ईरान की ओर से हो रहे हमलों का वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर की समीक्षा की गई।
- भारतीय समुदाय: संकट के समय में यूएई में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा और उनके सहयोग पर बातचीत हुई।
- यूएई का कड़ा रुख: रीम अल हाशिमी ने साफ किया कि यूएई अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।
- शांति के प्रयास: दोनों देश इस क्षेत्र में जल्द से जल्द शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हुए।
यह बैठक उस समय हुई है जब ईरान ने कई खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमले किए हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पहले यूएई के राष्ट्रपति से बात कर इन हमलों की निंदा की थी। भारत चाहता है कि खाड़ी क्षेत्र में शांति बनी रहे क्योंकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतें भी इसी क्षेत्र से जुड़ी हैं।




