UAE में कंपनियों के लिए कड़ा नियम लागू, टैक्स जानकारी छिपाने पर रद्द हो सकता है लाइसेंस
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अंतरराष्ट्रीय टैक्स पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने टैक्स उद्देश्यों के लिए जानकारी के आदान-प्रदान पर कैबिनेट निर्णय संख्या 209, 2025 जारी किया है। यह नया नियम 30 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गया है। इसके तहत अब विदेशी अधिकारियों द्वारा अनुरोध किए जाने पर टैक्स से जुड़ी जानकारी साझा करने की प्रक्रिया को कानूनी रूप दिया गया है।
कंपनियों को अब क्या करना होगा?
इस नए फैसले के तहत UAE में काम करने वाली सभी कंपनियों और अन्य संस्थाओं के लिए जिम्मेदारी बढ़ गई है। यह नियम ऑटोमैटिक जानकारी भेजने के लिए नहीं है, बल्कि अनुरोध आने पर जानकारी देने के लिए है। कंपनियों को अब अपने रिकॉर्ड्स को बहुत व्यवस्थित तरीके से रखना होगा। मुख्य नियमों में शामिल हैं:
- कंपनियों को ओनरशिप और पहचान से जुड़े दस्तावेज रखने होंगे।
- अकाउंटिंग, संपत्ति और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है।
- इन सभी दस्तावेजों को UAE के भीतर कम से कम पांच साल तक सुरक्षित रखना होगा।
नियम न मानने पर क्या होगी कार्रवाई?
सरकार ने इस मामले में काफी सख्ती दिखाई है। नए नियमों के मुताबिक, मांगी गई जानकारी को छिपाना या गलत जानकारी देना पूरी तरह से मना है। अगर कोई भी इकाई इन नियमों का पालन करने में विफल रहती है, तो उसे प्रशासनिक जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
बार-बार गलती दोहराने पर यह जुर्माना दोगुना हो सकता है। गंभीर मामलों में, जहां नियमों की अनदेखी ज्यादा होगी, वहां कंपनियों के बिजनेस लाइसेंस को सस्पेंड या रद्द भी किया जा सकता है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय टैक्स समझौतों के साथ तालमेल बिठाने के लिए उठाया गया है।




