UAE पर ईरान के हमले का NHRI ने किया कड़ा विरोध, आम नागरिकों और प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता

Praggya Singh sabal15 March 20262 min read6 viewsUAE

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में रह रहे आम लोगों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर नेशनल ह्यूमन राइट्स इंस्टीट्यूशन (NHRI) ने बड़ा बयान जारी किया है। 28 फरवरी 2026 से UAE की सीमा में हो रहे ईरानी सैन्य हमलों की NHRI ने कड़े शब्दों में निंदा की है। संस्था ने साफ तौर पर कहा है कि यह कदम सीधे तौर पर देश की संप्रभुता पर हमला है। इस हमले के कारण UAE में काम कर रहे प्रवासियों और वहां के स्थानीय लोगों के मानवाधिकारों पर गंभीर असर पड़ रहा है।

NHRI ने ईरान के हमले को लेकर क्या कहा?

मानवाधिकार संस्था (NHRI) ने 15 मार्च 2026 को एक आधिकारिक रिपोर्ट जारी कर इस हमले को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। संस्था का मानना है कि किसी भी देश की सीमा में इस तरह का सैन्य हमला वहां रह रहे आम नागरिकों के लिए बेहद खतरनाक है। गल्फ देशों में काम करने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा होता है, और ऐसे हमलों से उनकी जान को भी खतरा हो सकता है।

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संस्था का मुख्य फोकस इस बात पर है कि किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से आम लोगों की जिंदगी और उनके मूल अधिकार खतरे में नहीं पड़ने चाहिए। NHRI ने स्पष्ट किया है कि हर देश की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने नागरिकों और वहां रह रहे विदेशियों को सुरक्षित माहौल दे, जिस पर इन हमलों के कारण असर पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय नियमों (UN) का हुआ सीधा उल्लंघन

NHRI ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया है कि ईरान का यह कदम संयुक्त राष्ट्र (UN) के चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे नियम बनाए गए हैं जो बिना वजह आम नागरिकों को खतरे में डालने से रोकते हैं। संस्था ने कई मुख्य बातों पर ध्यान दिलाया है:

  • बल प्रयोग पर रोक: अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, सैन्य बल का इस्तेमाल कर नागरिकों को खतरे में डालना पूरी तरह गलत है।
  • आम लोगों की सुरक्षा: सैन्य हमलों में आम लोगों की जान को जोखिम में डालना मानवाधिकारों का सीधा हनन है।
  • संप्रभुता का सम्मान: किसी भी देश की सीमा में सैन्य कार्रवाई करना उस देश के अधिकारों और नियमों के खिलाफ है।

इस पूरे मामले को अब अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार ढांचे के तहत लाया गया है। संस्था का यह बयान एक आधिकारिक रिकॉर्ड की तरह काम करेगा, जिससे दुनिया भर के देशों को यह बताया जा सके कि आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर क्या खतरे पैदा हो रहे हैं।

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