UAE ने ईरान को दिया कड़ा जवाब, मिसाइल हमलों को बताया रणनीतिक विफलता, 2000 से ज़्यादा ड्रोन अब तक मार गिराए.
अबू धाबी में UAE राष्ट्रपति के सलाहकार डॉ. अनवर गर्गाश ने ईरान की हरकतों पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने ईरान के पूर्व विदेश मंत्री के लेख को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि पड़ोसियों पर हमला करना बहादुरी नहीं है। ईरान जिस तरह से मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है, वह उसकी कमजोरी और रणनीतिक विफलता को दिखाता है। UAE ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और अरब दुनिया अब ऐसी कहानियों को स्वीकार नहीं करेगी।
ईरान के हमलों को लेकर UAE ने क्या कहा?
डॉ. अनवर गर्गाश ने कहा कि ईरान की रणनीति में सबसे बड़ी कमी यह है कि वह अपने पड़ोसी अरब देशों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाता है। हजारों मिसाइलों और ड्रोन से आम लोगों को निशाना बनाना कोई जीत नहीं है। उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ के लेख की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें असलियत को छुपाया गया है। अब वह समय चला गया जब ऐसे हमलों को जीत के रूप में पेश किया जाता था। यूएई ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह खाड़ी क्षेत्र को अपने पड़ोसियों पर हमला करने के लिए एक मंच की तरह इस्तेमाल कर रहा है।
मिसाइल और ड्रोन हमलों से जुड़ी अहम जानकारी
UAE की वायु रक्षा प्रणालियों ने अब तक ईरान की ओर से किए गए बड़े हमलों को नाकाम किया है। पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों को देखें तो सुरक्षा बलों ने बड़ी संख्या में खतरों को हवा में ही खत्म कर दिया है।
| खतरे का प्रकार | कुल संख्या (इंटरसेप्टेड) |
|---|---|
| बैलिस्टिक मिसाइलें | 457 |
| क्रूज मिसाइलें | 19 |
| ड्रोन (Drones) | 2038 |
| मामूली क्षति | खलीफा इकोनॉमिक ज़ोन (2 अप्रैल) |
गुरुवार को खलीफा इकोनॉमिक ज़ोन के पास एक मिसाइल को रोका गया था, जिसके मलबे से मामूली नुकसान हुआ लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। यूएई सरकार ने कहा है कि वह आतंकवादियों के सामने कभी नहीं झुकेगी।
भविष्य के लिए क्या है UAE की मांग?
यूएई के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ किसी भी राजनीतिक बातचीत में कुछ शर्तों का होना बहुत जरूरी है। इसमें भविष्य में हमलों के खिलाफ स्पष्ट गारंटी और गैर-आक्रामकता का सिद्धांत शामिल होना चाहिए। इसके अलावा, ईरान द्वारा नागरिक सुविधाओं को निशाना बनाने के लिए मुआवजा देने की बात भी कही गई है। डॉ. गर्गाश ने कहा कि ईरान ने युद्ध से पहले अपने इरादों के बारे में पड़ोसियों को धोखे में रखा। खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, कतर और बहरीन पर भी हमलों का खतरा बना हुआ है, जिसे देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।




