UAE ने जताया दुख, संयुक्त राष्ट्र में ईरान के खिलाफ प्रस्ताव हुआ फेल, रूस और चीन ने लगाया वीटो.
संयुक्त राष्ट्र में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के मिशन ने गहरी निराशा जताई है। 7 अप्रैल 2026 को सुरक्षा परिषद में ईरान के अवैध हमलों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिलने वाली धमकियों को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन वह पास नहीं हो सका। यूएई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक स्पष्ट ढांचे की कमी की वजह से समुद्री रास्तों पर खतरा बना हुआ है। यह स्थिति पूरी दुनिया की आर्थिक सेहत के लिए ठीक नहीं है।
सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव क्यों नहीं हो सका पास?
बहरीन ने सुरक्षा परिषद में एक ड्राफ्ट प्रस्ताव पेश किया था जिसका मकसद ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों के आवागमन में बाधा डालने की कोशिशों को रोकना था। इस प्रस्ताव पर मतदान के दौरान 11 देशों ने इसके पक्ष में वोट दिया और 2 देश अनुपस्थित रहे। हालांकि रूस और चीन ने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करके इस प्रस्ताव को पूरी तरह रोक दिया। रूस का कहना है कि एकतरफा प्रस्ताव से चल रही शांति वार्ता में बाधा आ सकती है। इससे पहले 11 मार्च को सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव 2817 अपनाया था जिसमें ईरान के हमलों की निंदा की गई थी।
होर्मुज की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर इसका असर
यूएई के मिशन ने जोर देकर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी दुनिया के लिए खुला रहना चाहिए क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए मुख्य रास्ता है। इस मार्ग पर किसी भी तरह की रोक दुनिया को आर्थिक संकट की तरफ धकेल सकती है। ईरान पर आरोप है कि वह इस समुद्री रास्ते पर नियंत्रण करने की कोशिश कर रहा है जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
- ईरान ने फरवरी के अंत से यूएई और अन्य खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए थे।
- यूएई ने साफ किया है कि वह समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को जारी रखेगा।
- बहरीन के विदेश मंत्री ने भी कहा कि ईरान की हरकतें पड़ोसी देशों के प्रति आक्रामक इरादे दिखाती हैं।
- शिपिंग मार्ग बाधित होने से तेल और भोजन जैसी जरूरी चीजों की वैश्विक सप्लाई पर बुरा असर पड़ता है।




