UN ESCWA की चेतावनी, खाने के दाम 20% बढ़े तो अरब देशों में 50 लाख और लोगों पर बढ़ेगा संकट
संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ESCWA) ने एक नई रिपोर्ट में चेतावनी जारी की है कि अगर दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों के दाम 20 फीसदी बढ़ते हैं, तो अरब देशों में रहने वाले करीब 50 लाख और लोग खाद्य असुरक्षा का शिकार हो सकते हैं। यह चेतावनी 2 अप्रैल 2026 को जारी की गई पॉलिसी ब्रीफ में दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, खास तौर पर उन कम आय वाले अरब देशों पर खतरा ज्यादा है जो खाने के सामान के लिए आयात पर निर्भर हैं और जिनके पास आर्थिक संसाधन सीमित हैं।
गल्फ देशों और प्रवासियों पर क्या असर पड़ेगा?
क्षेत्र में चल रहे तनाव की वजह से तेल और गैस की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है, जिससे तेल की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। इसका असर सीधे तौर पर ट्रांसपोर्ट और इंश्योरेंस की लागत पर पड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ती है।
- सऊदी और दुबई जैसे GCC देशों में रहने वाले करीब 4 करोड़ लोग अपनी पानी की जरूरतों के लिए समुद्र के पानी को साफ करने वाले प्लांट्स पर निर्भर हैं।
- किसी भी तरह के संघर्ष से इन प्लांट्स या बिजली व्यवस्था को नुकसान पहुंचा, तो पानी का बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो सकता है।
- अरब क्षेत्र अपनी जरूरत का ज्यादातर अनाज बाहर से मंगवाता है और यहां अनाज का स्टॉक केवल तीन महीने के लिए ही उपलब्ध है।
- ईंधन और खाद के बढ़ते दामों की वजह से खेती की लागत बढ़ेगी, जिसका बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।
संकट से बचने के लिए क्या तैयारी जरूरी है?
ESCWA के कार्यवाहक कार्यकारी सचिव Mourad Wahba ने कहा है कि अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो गरीबी और सामाजिक अस्थिरता बढ़ सकती है। उन्होंने इस संकट से निपटने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
| उपाय | महत्व |
|---|---|
| अर्ली वार्निंग सिस्टम | किसी भी संकट की समय से पहले जानकारी मिलना |
| क्षेत्रीय अनाज भंडार | संकट के समय खाने की कमी को रोकना |
| सप्लाई चैन में बदलाव | व्यापार के नए और सुरक्षित रास्तों की खोज |
| बुनियादी ढांचा निवेश | ऊर्जा और पानी के सिस्टम को मजबूत बनाना |
प्रवासियों के लिए यह स्थिति महंगाई के रूप में सामने आ सकती है। अगर खाने और ईंधन के दाम बढ़ते हैं, तो खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के मासिक खर्च पर इसका असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल तेल बाजार भारी दबाव में है और Strait of Hormuz की स्थिति पर सबकी नजर बनी हुई है।




