UN Human Rights Council का बड़ा फैसला, सऊदी अरब और खाड़ी देशों पर ईरानी हमलों की निंदा, जांच की मांग
25 मार्च 2026 को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा प्रस्ताव पास किया है। सऊदी अरब, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों और जॉर्डन ने मिलकर यह प्रस्ताव पेश किया था। इसमें ईरान द्वारा किए गए सैन्य हमलों और नागरिक इलाकों को निशाना बनाने की कड़ी आलोचना की गई है। परिषद के सभी 47 सदस्यों ने बिना किसी विरोध के इस प्रस्ताव का समर्थन किया है और ईरान से जवाबदेही की मांग की है।
खाड़ी देशों ने ईरान पर क्या आरोप लगाए हैं?
बहरीन, कुवैत और यूएई जैसे देशों ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सऊदी अरब के प्रतिनिधि राजदूत अब्दुलमोहसेन बिन खोथैला ने कहा कि ईरानी आक्रामकता को किसी भी तरह सही नहीं ठहराया जा सकता और इसके लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना जरूरी है। खाड़ी देशों के प्रतिनिधियों ने परिषद को बताया कि उनके देश इस सैन्य संघर्ष का हिस्सा नहीं थे, फिर भी उन्हें निशाना बनाया गया।
- बहरीन ने कहा कि उन्होंने 26 दिनों तक ईरान के बिना वजह के हमलों का सामना किया है।
- कुवैत के राजदूत नासिर अब्दुल्ला ने ईरान पर नागरिक इलाकों और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर हमले करने का आरोप लगाया।
- यूएई ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अस्थिर करने वाली कार्रवाई बताया।
- मिस्र ने भी चेतावनी दी है कि इस तरह के बढ़ते तनाव के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
इस प्रस्ताव में किन मुख्य बातों का जिक्र है?
प्रस्ताव में ईरान से तुरंत सभी हमले रोकने और पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की गई है। मानवाधिकार परिषद ने ईरान के उन कदमों की भी आलोचना की है जिसका मकसद हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना था। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने चेतावनी दी है कि परमाणु केंद्रों और नागरिक क्षेत्रों के पास हमले करना एक बड़ी तबाही को न्योता देने जैसा है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| प्रस्ताव की तारीख | 25 मार्च 2026 |
| प्रस्ताव पेश करने वाले | सऊदी अरब, GCC देश और जॉर्डन |
| हमलों का असर | 85% ईरानी हमले खाड़ी देशों पर हुए |
| अगली रिपोर्ट | जून में परिषद के सामने पेश होगी |
परिषद ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय से इन हमलों के मानवीय प्रभाव पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। यह रिपोर्ट जून में होने वाले अगले सत्र में पेश की जाएगी। खाड़ी देशों ने साफ किया है कि उन्होंने अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ हमले के लिए नहीं होने दिया है।




