UN का बड़ा फैसला: ईरान के हमलों की हुई कड़ी निंदा, UAE और सऊदी समेत कई देशों पर हुए थे हमले
जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया है। इसमें ईरान द्वारा संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कुवैत और जॉर्डन जैसे देशों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की गई है। 100 से ज्यादा देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। परिषद ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और आम लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है। इस फैसले के बाद खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
हमलों से कितना नुकसान हुआ और UN ने क्या कहा?
UAE के प्रतिनिधि Jamal Al Musharakh ने बताया कि पिछले 26 दिनों में उनके देश पर 2,000 से ज्यादा मिसाइलें और ड्रोन दागे गए हैं। इन हमलों में UAE के 3 सैनिकों और 6 आम नागरिकों की जान गई है, जबकि 166 लोग घायल हुए हैं। UN मानवाधिकार प्रमुख Volker Turk ने चेतावनी दी है कि नागरिक बुनियादी ढांचे और आम लोगों को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकता है। जॉर्डन ने भी जानकारी दी है कि उसने 240 से ज्यादा मिसाइलों को बीच में ही मार गिराया है, लेकिन फिर भी वहां के आम नागरिकों को जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है।
इस प्रस्ताव में शामिल मुख्य बातें और आंकड़े
| देश या संस्था | मुख्य जानकारी और प्रभाव |
|---|---|
| UAE | 2,000 से ज्यादा मिसाइल और ड्रोन हमले झेले |
| जॉर्डन | 240+ मिसाइलें इंटरसेप्ट कीं, 24 नागरिक घायल |
| UNSC 2817 | 11 मार्च को हमलों के खिलाफ प्रस्ताव पास हुआ था |
| समर्थन | 100 से अधिक देशों ने इस प्रस्ताव का साथ दिया |
| ईरान | अंतरराष्ट्रीय कानून मानने और हमले रोकने की अपील |
| वोटिंग स्टेटस | रूस और चीन ने सुरक्षा परिषद की वोटिंग से दूरी बनाई |
कुवैत के राजदूत Naser Abdullah H. M. Alhayen ने कहा कि खाड़ी देश इस समय क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़े खतरे का सामना कर रहे हैं। ईरान का यह रवैया अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता के खिलाफ है। विशेषज्ञों के अनुसार, 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए तनाव के बाद से यह संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। UN के विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि ईरान को आत्मरक्षा का अधिकार है, लेकिन नागरिक ठिकानों पर हमले करना किसी भी हाल में सही नहीं है।




