लेबनान में पिछले कुछ दिनों के भीतर UNIFIL के तीन शांति सैनिकों की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है। फ्रांस और ब्रिटेन सहित 10 यूरोपीय देशों ने एकजुट होकर सभी पक्षों से जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यह घटनाएं दक्षिणी लेबनान में सक्रिय युद्ध क्षेत्र के दौरान हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस मामले पर चर्चा करने के लिए फ्रांस ने आपातकालीन बैठक की मांग भी की है।

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शांति सैनिकों की मौत और जांच को लेकर क्या है ताजा अपडेट?

हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, 29 और 30 मार्च 2026 को हुई अलग-अलग घटनाओं में इंडोनेशिया के तीन शांति सैनिक मारे गए हैं। इनमें से दो जवानों की मौत एक सड़क किनारे हुए धमाके में हुई जब उनका वाहन बनी हयान (Bani Hayyan) के पास से गुजर रहा था। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस (António Guterres) ने इस हमले की निंदा की है और इसके लिए जवाबदेही तय करने की बात कही है। शांति सैनिकों की सुरक्षा के लिए बने अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन होने पर इसे युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा जा सकता है।

  • 30 मार्च को सड़क किनारे हुए विस्फोट में दो इंडोनेशियाई जवानों की मौत हुई।
  • 29 मार्च को एक अन्य जवान ने एक प्रोजेक्टाइल फटने की वजह से अपनी जान गंवाई।
  • फ्रांस ने इस हमले को लेकर इजरायली राजदूत के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
  • इजरायली सेना इन घटनाओं की जांच कर रही है और उसका कहना है कि इसके पीछे हिजबुल्लाह (Hezbollah) का हाथ हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किन देशों ने क्या कदम उठाए हैं?

यूरोपीय संघ के शीर्ष राजनयिक के साथ मिलकर बेल्जियम, क्रोएशिया, साइप्रस, फ्रांस, ग्रीस, इटली, माल्टा, नीदरलैंड, पुर्तगाल और ब्रिटेन ने एक साझा बयान जारी किया है। इसमें शांति सैनिकों के परिसरों और कर्मियों की सुरक्षा की मांग की गई है। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने भी शांति सैनिकों को निशाना बनाने की कड़ी आलोचना की है और तुरंत युद्धविराम की बात कही है।

संस्था या देश आधिकारिक बयान और प्रतिक्रिया
UNIFIL सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने और जवानों को सुरक्षित रखने की अपील की गई है।
फ्रांस सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई और इजरायली सैनिकों द्वारा की गई डराने वाली हरकतों को गलत बताया।
इजरायल सैन्य जांच जारी है और शुरुआती रिपोर्ट में हिजबुल्लाह के बमों को मौत का संभावित कारण बताया है।
यूरोपीय देश 10 देशों ने सामूहिक रूप से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी पक्षों पर दबाव बनाया है।