UNSC में अमेरिका और इजरायल को फ्रांस ने दिया बड़ा झटका, रूस-चीन के साथ मिलकर ईरान के समर्थन में किया वोट
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक बहुत बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. फ्रांस ने करीब 23 साल बाद अमेरिका और इजरायल को पीछे छोड़ते हुए रूस और चीन का साथ दिया है. यह पूरा मामला ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने और उस पर सैन्य कार्रवाई से जुड़ा है. इस फैसले ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है क्योंकि लंबे समय बाद ये तीन ताकतवर देश एक साथ खड़े नजर आए हैं.
फ्रांस ने क्यों किया अमेरिका के खिलाफ वीटो?
फ्रांस ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सैन्य ताकत से खोलने के प्रस्ताव पर वीटो का इस्तेमाल किया है. बहरीन ने खाड़ी देशों की तरफ से यह प्रस्ताव रखा था ताकि फौजी कार्रवाई के जरिए इस समुद्री रास्ते को दोबारा चालू किया जा सके. फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron का मानना है कि ताकत का इस्तेमाल करना ठीक नहीं है और इससे वहां से गुजरने वाले जहाजों को ज्यादा खतरा होगा. साल 2003 में इराक युद्ध के बाद यह पहली बार है जब फ्रांस ने अमेरिका के खिलाफ रूस और चीन का हाथ थामा है.
खाड़ी देशों और आम जनता पर क्या होगा इसका असर?
ईरान ने 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के साथ जंग शुरू होने के बाद होर्मुज का रास्ता बंद कर दिया था. इस वजह से खाड़ी देशों से आने वाले तेल की सप्लाई रुक गई है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. बहरीन ने इसे आर्थिक हमला बताया है. खाड़ी में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इस इलाके में बढ़ते तनाव से वहां के कामकाज और सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है.
| विवरण | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| वीटो की तारीख | 3 अप्रैल 2026 |
| विरोध करने वाले देश | फ्रांस, रूस, चीन |
| प्रस्ताव लाने वाला देश | बहरीन (खाड़ी देशों की ओर से) |
| मुख्य विवाद | होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना |
| पिछला मौका | साल 2003 (इराक युद्ध के दौरान) |




