संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित करने के प्रस्ताव पर होने वाली वोटिंग को फिलहाल टाल दिया गया है. यह वोटिंग शुक्रवार 3 अप्रैल 2026 को होनी थी, लेकिन अब इसे अगले हफ्ते यानी 7 से 11 अप्रैल के बीच कराने की तैयारी है. बहरीन की तरफ से पेश किए गए इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य समुद्री रास्तों पर जहाजों को सुरक्षा देना है ताकि वैश्विक व्यापार में कोई बाधा न आए.
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वोटिंग को आगे क्यों बढ़ाया गया और क्या है पूरा विवाद?
सुरक्षा परिषद में इस प्रस्ताव पर वोटिंग टलने के पीछे मुख्य कारण गुड फ्राइडे की सार्वजनिक छुट्टी और सदस्य देशों के बीच भाषा को लेकर असहमति है. चीन, रूस और फ्रांस ने प्रस्ताव की पुरानी भाषा का विरोध किया था क्योंकि उसमें सैन्य बल के इस्तेमाल की बात कही गई थी. अब नए संशोधित प्रस्ताव में केवल रक्षात्मक कदम (Defensive Measures) उठाने की अनुमति मांगी गई है ताकि समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखा जा सके. यह अनुमति लागू होने के बाद कम से कम छह महीने तक प्रभावी रहेगी.
प्रवासियों और तेल सप्लाई पर इसका क्या असर होगा?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है और ईरान द्वारा 28 फरवरी 2026 को इसे बंद किए जाने के बाद से दुनिया की 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है. खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इस रास्ते के बंद रहने से महंगाई और ईंधन की किल्लत बढ़ सकती है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि वे अपनी संप्रभुता की रक्षा करेंगे और किसी भी भड़काऊ कार्रवाई का कड़ा जवाब देंगे.
| विषय | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| प्रस्ताव पेश करने वाला देश | Bahrain |
| वोटिंग की नई संभावित तारीख | 7 अप्रैल से 11 अप्रैल 2026 |
| मुख्य विरोध करने वाले देश | China, Russia, France |
| प्रस्ताव की अवधि | न्यूनतम 6 महीने |
| प्रभावित सप्लाई | 20% ग्लोबल तेल और गैस |
