अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते के युद्धविराम का ऐलान, पाकिस्तान ने की मध्यस्थता, इसराइल ने लेबनान को रखा बाहर
अमेरिका और ईरान के बीच जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ी राहत की खबर आई है। पाकिस्तान की कोशिशों से दोनों देशों के बीच दो हफ्ते के लिए युद्धविराम पर सहमति बनी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते का ऐलान किया है जिसमें ईरान को अपनी सैन्य गतिविधियां रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तुरंत खोलने के लिए कहा गया है। ईरान भी अपनी शर्तें मानकर बातचीत की मेज पर आने को तैयार हो गया है, लेकिन इसराइल ने साफ कर दिया है कि लेबनान में उसके हमले जारी रहेंगे।
युद्धविराम की मुख्य शर्तें और महत्वपूर्ण जानकारी
इस समझौते को लेकर अलग-अलग देशों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। जहां पाकिस्तान और ईरान इसे लेबनान सहित सभी मोर्चों पर लागू मान रहे हैं, वहीं इसराइल का कहना है कि यह केवल अमेरिका और ईरान के बीच है। समझौते से जुड़ी कुछ खास बातें नीचे दी गई हैं:
| विषय | मुख्य जानकारी |
|---|---|
| अवधि | दो हफ्ते का युद्धविराम (8 अप्रैल 2026 से शुरू) |
| मध्यस्थता | पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और जनरल आसिम मुनीर |
| ईरान की मांग | प्रतिबंध हटाना और यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को मंजूरी |
| अगली बैठक | 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत शुरू होगी |
| इसराइल का रुख | बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान को इस समझौते से बाहर रखा है |
| विपक्ष की राय | यायर लैपिड ने इसे इसराइल के लिए राजनीतिक आपदा बताया है |
लेबनान की स्थिति और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया
भले ही अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की बात हो रही है, लेकिन लेबनान में जमीन पर हालात अब भी खराब हैं। इसराइली सेना ने वहां अपने जमीनी ऑपरेशन और हमले जारी रखे हैं। लेबनानी सेना ने अपने नागरिकों को सलाह दी है कि वे अभी दक्षिण के गांवों की तरफ न लौटें क्योंकि वहां खतरा बना हुआ है।
- मिस्र: मिस्र के विदेश मंत्रालय ने लेबनान पर हो रहे हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है।
- यूरोपीय संघ: काजा क्लास ने इसे कूटनीति के लिए एक अच्छा मौका बताया है।
- संयुक्त राष्ट्र: महासचिव ने सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने की अपील की है।
- जमीनी हालात: लेबनान में पिछले एक महीने में 10 लाख से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ चुके हैं।
- हिजबुल्लाह: सूत्रों के अनुसार हिजबुल्लाह ने हमले रोके हैं, लेकिन इसराइल के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।




