अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू, ट्रंप ने रोके सैन्य हमले और ईरान ने दी अपनी सफाई
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बड़ी कोशिशें शुरू हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने जानकारी दी है कि अमेरिका इस समय ईरान के साथ बातचीत में लगा हुआ है और यह प्रक्रिया सही दिशा में जा रही है। राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि तेहरान समझौता करने के लिए उत्सुक है, लेकिन वह इसे सार्वजनिक रूप से जाहिर नहीं करना चाहता। इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका ने ईरान के पावर प्लांट और बुनियादी ढांचे पर होने वाले हमलों को पांच दिनों के लिए टाल दिया है।
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इस बातचीत को लेकर अमेरिका और ईरान का क्या रुख है?
अमेरिका की ओर से मिडिल ईस्ट के विशेष दूत Steve Witkoff इन बातचीत की कमान संभाल रहे हैं। राष्ट्रपति Trump का कहना है कि बातचीत के दौरान प्रगति होने तक सैन्य कार्रवाई को रोक दिया गया है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने सीधे तौर पर किसी भी तरह की बातचीत से इनकार किया है। उनका कहना है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच केवल मध्यस्थ देशों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है और इसे सीधी बातचीत नहीं माना जाना चाहिए। ईरान के कुछ अन्य नेताओं ने भी इस तरह की चर्चाओं से अपना नाम अलग रखा है।
बातचीत की मुख्य शर्तें और मध्यस्थ देश कौन से हैं?
इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश दोनों पक्षों को आमने-सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे के सामने कई कड़ी शर्तें रखी हैं जो इस प्रकार हैं:
| पक्ष | प्रमुख मांगें और शर्तें |
|---|---|
| United States | मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करना, यूरेनियम संवर्धन पर रोक और क्षेत्रीय समूहों को समर्थन बंद करना। |
| Iran | ईरानी अधिकारियों पर हमलों को रोकना, युद्ध के कारण हुए नुकसान का मुआवजा और समुद्री रास्तों पर अपना अधिकार। |
अमेरिका की ओर से Jared Kushner और Marco Rubio जैसे वरिष्ठ नेता भी इन कूटनीतिक प्रयासों में शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं, Pentagon ने किसी भी आपात स्थिति के लिए अपनी सैन्य योजनाएं तैयार रखी हैं, जिसमें बड़े हमले शामिल हो सकते हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के पास काफी मात्रा में संवर्धित यूरेनियम मौजूद है, जिसे लेकर अमेरिका की चिंताएं बनी हुई हैं।




