अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के लिए बातचीत का दौर चल रहा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोई छोटा सौदा नहीं बल्कि एक ‘बड़ा समझौता’ (grand bargain) करना चाहते हैं। अमेरिका ने ईरान को आर्थिक सुधार का प्रस्ताव दिया है, लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि ईरान को एक सामान्य देश की तरह व्यवहार करना होगा।
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अमेरिका और ईरान की मुख्य शर्तें क्या हैं?
अमेरिका ने साफ़ कर दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति कभी नहीं दी जाएगी। वहीं ईरान अपनी संपत्ति और प्रतिबंधों को लेकर मांगें रख रहा है। दोनों देशों की मुख्य शर्तें नीचे दी गई टेबल में हैं:
| पक्ष | मुख्य मांगें और शर्तें |
|---|---|
| अमेरिका | परमाणु हथियारों पर पूरी रोक और यूरेनियम संवर्धन (enrichment) बंद करना |
| अमेरिका | परमाणु केंद्रों को खत्म करना और आतंकी समूहों की फंडिंग रोकना |
| ईरान | जमी हुई संपत्ति को वापस पाना और आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना |
| ईरान | होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपना नियंत्रण रखना |
| ईरान | शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम संवर्धन का अधिकार |
अभी ज़मीनी स्थिति क्या है?
दोनों देशों के बीच एक कमज़ोर सीज़फायर पिछले छह से सात दिनों से चल रहा है। हालांकि, तनाव अभी भी कम नहीं हुआ है और अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी है। हाल ही में अमेरिकी नेवी ने ईरान से तेल ले जा रहे दो जहाजों को वापस लौटने का निर्देश दिया। ईरान ने इन हरकतों पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
भविष्य की बातचीत और दुनिया पर असर
राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि ईरान अब समझौता करना चाहता है और आने वाले दो दिनों में पाकिस्तान में फिर से बातचीत शुरू हो सकती है। दूसरी तरफ, IMF ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट के इस झगड़े से दुनिया की आर्थिक हालत खराब हो सकती है। अमेरिका ने ईरान के तेल पर दी गई कुछ पुरानी रियायतों को अब खत्म करने का फैसला किया है।
