US-Iran Tension: अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी की, तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार, दुनिया भर में मची खलबली
अमेरिका और ईरान के बीच शांति के लिए की गई कोशिशें पूरी तरह नाकाम हो गई हैं। इस घटनाक्रम के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बंदरगाहों और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ की समुद्री घेराबंदी का ऐलान कर दिया है। इस खबर के आते ही अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गईं, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर असर पड़ना तय है।
इस्लामाबाद में क्या हुआ और बातचीत क्यों विफल रही?
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ के बीच बहुत अहम बातचीत हुई। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अपना सबसे अच्छा प्रस्ताव ईरान के सामने रखा, लेकिन ईरान ने परमाणु हथियारों की अपनी महत्वाकांक्षाओं को छोड़ने से साफ़ मना कर दिया। वहीं ईरान की तरफ से कहा गया कि अमेरिकी टीम उनका भरोसा जीतने में नाकाम रही, हालांकि भविष्य में बातचीत के रास्ते अभी भी खुले हैं।
अमेरिका की घेराबंदी और दुनिया पर इसका क्या असर होगा?
डोनाल्ड ट्रंप ने 13 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे से ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी लागू करने का आदेश दिया। US Central Command ने साफ़ किया है कि यह नियम उन सभी जहाजों पर लागू होगा जो ईरानी बंदरगाहों में जा रहे हैं या वहां से बाहर निकल रहे हैं। इस तनाव की वजह से तेल के दाम बढ़ गए हैं। ब्रिटेन ने साफ़ कह दिया है कि वह इस घेराबंदी का समर्थन नहीं करेगा, जबकि फ्रांस और ब्रिटेन ने मिलकर समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाने के लिए एक कॉन्फ्रेंस बुलाने का फैसला किया है।
इस पूरे विवाद से जुड़े मुख्य अपडेट नीचे दी गई टेबल में देखें:
| संस्था/व्यक्ति | बयान या कार्रवाई |
|---|---|
| Donald Trump | ईरानी बंदरगाहों की समुद्री घेराबंदी का ऐलान किया |
| JD Vance | कहा कि ईरान ने परमाणु शर्तें मानने से इनकार किया |
| Masoud Pezeshkian | कहा कि अमेरिका को ईरान के अधिकारों का सम्मान करना होगा |
| IRGC (ईरान) | घेराबंदी को समुद्री डकैती बताया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी |
| UK Government | अमेरिका की घेराबंदी का समर्थन करने से मना किया |
| France | समुद्री आवाजाही बहाल करने के लिए कॉन्फ्रेंस बुलाने की बात कही |
| Oil Market | तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गईं |



