अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है। इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता विफल होने के बाद राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी का आदेश दिया है। इस बीच सोशल मीडिया पर ट्रंप की दयालुता को लेकर कुछ खबरें चल रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

📰: अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी की, इस्लामाबाद में शांति वार्ता हुई नाकाम

ईरान की घेराबंदी और ट्रंप का फैसला क्या है?

राष्ट्रपति Donald Trump ने 13 अप्रैल 2026 को ईरान के बंदरगाहों और Strait of Hormuz की आंशिक घेराबंदी शुरू कर दी है। यह फैसला तब आया जब उपराष्ट्रपति JD Vance की अगुवाई में हुई शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हुई। ट्रंप ने साफ कहा है कि जो भी ईरानी जहाज इस घेराबंदी के करीब आएगा, उसे तुरंत खत्म कर दिया जाएगा।

क्या ट्रंप ने दया की वजह से हमले रोके थे?

सोशल मीडिया पर SaudiNews50 के एक पोस्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी रक्षा सचिव के अनुसार ट्रंप ने दया दिखाते हुए ईरान के ऊर्जा केंद्रों पर हमला नहीं किया। हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 23 मार्च 2026 को हमलों को सिर्फ पांच दिनों के लिए टाला गया था। इसका असली कारण दया नहीं, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए चल रही बातचीत थी।

ईरान की प्रतिक्रिया और वर्तमान स्थिति क्या है?

अमेरिकी घेराबंदी के जवाब में ईरान की सेना ने कड़ी चेतावनी दी है। ईरान ने कहा है कि अगर उसके बंदरगाहों को खतरा पहुँचाया गया, तो वह इसका पलटवार करेगा। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है क्योंकि ईरान अपने परमाणु लक्ष्यों को छोड़ने को तैयार नहीं हुआ, जिसकी वजह से शांति बातचीत विफल रही।

Sushma Kumari

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