अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि ईरान के साथ इस्लामाबाद में हुई बातचीत में कुछ प्रगति हुई है। हालांकि, दोनों देश युद्ध खत्म करने के किसी अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सके। यह जानकारी उन्होंने Fox News को दिए एक इंटरव्यू में साझा की। इसी बीच अमेरिकी नौसेना ने सोमवार 13 अप्रैल 2026 से ईरान के सभी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी है।

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बातचीत में क्या हुआ और डील क्यों नहीं हो पाई?

उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि बातचीत तो आगे बढ़ी, लेकिन ईरान के प्रतिनिधि वहां कोई फैसला लेने के हकदार नहीं थे। उन्हें अंतिम मंजूरी के लिए तेहरान वापस जाना पड़ा ताकि वहां के सुप्रीम लीडर या उच्च अधिकारियों से अनुमति ली जा सके। अमेरिका का मानना है कि अब गेंद ईरान के पाले में है और समझौता उनके फैसले पर टिका है।

अमेरिका ने ईरान के सामने क्या शर्तें रखीं?

अमेरिका ने बातचीत के दौरान कुछ सख्त शर्तें तय की थीं। अमेरिका का कहना है कि शांति के लिए ईरान को इन मांगों को मानना होगा।

शर्त विवरण
यूरेनियम संवर्धन यूरेनियम संवर्धन की प्रक्रिया को पूरी तरह बंद करना होगा
परमाणु सुविधाएं प्रमुख परमाणु केंद्रों को पूरी तरह खत्म करना होगा
यूरेनियम वापसी उच्च समृद्ध यूरेनियम को वापस करना होगा
प्रॉक्सी ग्रुप हमास, हिजबुल्लाह और हूतियों को दी जाने वाली फंडिंग रोकनी होगी
हॉर्मुज जलडमरूमध्य बिना टोल वसूले रास्ता पूरी तरह खोलना होगा
क्षेत्रीय शांति क्षेत्रीय शांति और तनाव कम करने के ढांचे को स्वीकार करना होगा

ईरान और पाकिस्तान का क्या कहना है?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग्ची ने अलग बात कही है। उन्होंने दावा किया कि दोनों देश समझौते के बहुत करीब थे, लेकिन अमेरिका द्वारा नाकेबंदी के ऐलान ने स्थिति बदल दी। वहीं, पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों देशों से युद्धविराम बनाए रखने की अपील की है। पाकिस्तान ने आने वाले दिनों में फिर से बातचीत करवाने की पेशकश की है।