US-Iran Peace Talks Fail: इस्लामाबाद में बातचीत टूटी, ट्रंप ने Strait of Hormuz को किया ब्लॉक, ईरान ने दी चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच शांति की कोशिशें नाकाम रही हैं। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 21 घंटे से ज्यादा चली बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Strait of Hormuz में नेवल ब्लॉकेड यानी नाकेबंदी का एलान कर दिया है, जिससे समुद्री व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
बातचीत क्यों नहीं हो पाई और मुख्य विवाद क्या था?
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे J.D. Vance ने बताया कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का पक्का वादा करने को तैयार नहीं था। दूसरी तरफ ईरान के प्रतिनिधि मोहम्मद बागर कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका भरोसा जीतने में नाकाम रहा। दोनों देशों के बीच मुख्य विवाद Strait of Hormuz के कंट्रोल और ईरान के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को लेकर था।
ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका की मांगों को गलत और गैरकानूनी बताया। वहीं इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि जंग अभी खत्म नहीं हुई है और उन्होंने ईरान के परमाणु और मिसाइल प्रोग्राम को कमजोर करने का दावा किया।
नाकेबंदी का फैसला और ईरान की जवाबी चेतावनी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आदेश दिया है कि अमेरिकी नेवी अब किसी भी जहाज़ को Strait of Hormuz से अंदर या बाहर नहीं जाने देगी, जब तक ईरान इसे सभी के लिए नहीं खोलता। इस कदम से 7 अप्रैल को तय हुई दो हफ्ते की ceasefire यानी युद्धविराम की स्थिति अब खतरे में पड़ गई है।
जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि अगर कोई भी सैन्य जहाज़ उनके करीब आया, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने साफ़ कहा कि यह रास्ता उनके कंट्रोल में है और सिर्फ तय नियमों के हिसाब से ही जहाजों को आने दिया जाएगा।
| देश/पक्ष | मुख्य व्यक्ति/संस्था | मुख्य स्टैंड/मांग |
|---|---|---|
| अमेरिका | डोनाल्ड ट्रंप, J.D. Vance | परमाणु हथियार न बनाने का पक्का वादा |
| ईरान | मोहम्मद बागर कलीबाफ | प्रतिबंधों को हटाना और परमाणु ऊर्जा का हक |
| इसराइल | बेंजामिन नेतन्याहू | ईरान के परमाणु और मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करना |
ईरान की सड़कों पर क्या स्थिति है?
ईरानी सरकार ने अपने समर्थकों को सड़कों पर उतरकर कंट्रोल बनाए रखने के लिए कहा है। सरकार का मकसद यह दिखाना है कि हमलों और इंटरनेट बंद होने के बावजूद वहां की सत्ता मजबूत है। राष्ट्रपति और विदेश मंत्री खुद रैलियों में शामिल होकर लोगों का जोश बढ़ा रहे हैं।
हालांकि, कुछ सोशल मीडिया रिपोर्टों में स्थानीय नागरिकों ने दावा किया है कि इन रैलियों में आने वाले लोगों को पैसे दिए जा रहे हैं। कई लोग चाहते हैं कि अमेरिका इस मामले में दखल दे ताकि मौजूदा शासन कमजोर हो सके।




