अमेरिका और ईरान के बीच शांति के लिए इस्लामाबाद में हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई. 11 अप्रैल से शुरू हुई इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई. ईरान का कहना है कि जब तक उसकी संप्रभुता और सम्मान का ख्याल नहीं रखा जाएगा, कोई समझौता नहीं होगा. इस विफलता से अब मौजूदा युद्धविराम पर भी खतरा मंडरा रहा है.

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ईरान की क्या है मांग और एक्सपर्ट का क्या कहना है?

विदेशी मामलों के एक्सपर्ट Waiel Awwad ने कहा कि ईरान अमेरिका को साफ संदेश दे रहा है कि उसके सम्मान और संप्रभुता का आदर करना जरूरी है. उन्होंने बताया कि अमेरिका का ‘मानो या छोड़ो’ वाला रवैया अंतरराष्ट्रीय राजनीति में काम नहीं करता है. ईरान अब मजबूती की स्थिति से बात कर रहा है और पिछले अनुभवों के कारण अमेरिका पर भरोसा नहीं कर रहा है. ईरान चाहता है कि किसी भी डील से पहले उसे ठोस गारंटी मिले.

बातचीत क्यों फेल हुई और किन मुद्दों पर हुआ विवाद?

अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि परमाणु हथियारों को लेकर अमेरिका की कुछ ‘रेड लाइन’ थीं, जिन पर सहमति नहीं बन पाई. वहीं, ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि दूसरी तरफ के लोगों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. बातचीत के दौरान Strait of Hormuz और इजराइल के हमलों जैसे संवेदनशील मुद्दों ने मामले को और जटिल बना दिया, जिससे एक सत्र में समझौता करना मुश्किल हो गया.

मुख्य विवरण जानकारी
तारीख 11 और 12 अप्रैल, 2026
स्थान इस्लामाबाद, पाकिस्तान
अमेरिकी प्रतिनिधि JD Vance (उपराष्ट्रपति)
ईरानी प्रतिनिधि Mohammad Bagher Ghalibaf
मध्यस्थ प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif
विवाद के मुद्दे परमाणु हथियार, Strait of Hormuz और संप्रभुता
Sushma Kumari

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