US-Iran Talks Update: पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान की बातचीत रही नाकाम, एक्सपर्ट ने कहा चर्चा को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच करीब 21 घंटे तक सीधी बातचीत चली. इस बैठक का मकसद दोनों देशों के बीच पुराने विवादों को सुलझाना था, लेकिन अंत में कोई औपचारिक समझौता नहीं हो पाया. अब विशेषज्ञों का मानना है कि इन बातचीत के शोर को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया.
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बातचीत नाकाम होने की मुख्य वजह क्या रही?
अमेरिका ने ईरान के सामने अपनी कुछ सख्त शर्तें रखी थीं, जिसमें सबसे मुख्य बात यह थी कि ईरान परमाणु हथियारों को विकसित न करने का वादा करे. US वाइस प्रेसिडेंट JD Vance ने बताया कि ईरान ने उनकी शर्तों को स्वीकार नहीं किया. दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका की मांगों को नाजायज और बहुत ज्यादा बताया, जिससे दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई.
बैठक से जुड़ी जरूरी जानकारियां
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तारीख | 11 और 12 अप्रैल, 2026 |
| स्थान | इस्लामाबाद, पाकिस्तान |
| अमेरिकी टीम | JD Vance, Steve Witkoff और Jared Kushner |
| ईरानी टीम | Mohammad Baqer Ghalibaf और Abbas Araghchi |
| मध्यस्थ (Mediators) | Shehbaz Sharif, Ishaq Dar और Asim Munir |
| मुख्य मुद्दे | परमाणु प्रोग्राम, Strait of Hormuz का नियंत्रण और प्रतिबंध |
एक्सपर्ट ने पाकिस्तान की भूमिका पर क्या कहा?
लंदन यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट Burzine Waghmar ने इस पूरी प्रक्रिया को अजीब बताया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का एक जिम्मेदार मध्यस्थ के रूप में सामने आना काफी विडंबनापूर्ण है, क्योंकि दुनिया अक्सर पाकिस्तान को एक अलग और आलोचनात्मक नजरिए से देखती है. Waghmar के मुताबिक, पाकिस्तान शायद दुनिया के सामने अपनी छवि सुधारने और ग्लोबल लेवल पर अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा था.




