US-Iran Peace Talks: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान की बड़ी बैठक शुरू, 15 दिन में तय होगी शांति या फिर जंग
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अहम बातचीत शुरू हो गई है। दोनों देशों के प्रतिनिधि शनिवार सुबह से आमने-सामने हैं और उनके पास किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने के लिए सिर्फ 15 दिन का समय है। पाकिस्तान ने इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है ताकि एक नाजुक संघर्ष विराम को स्थायी शांति में बदला जा सके।
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ईरान और अमेरिका की क्या हैं शर्तें?
ईरान ने बातचीत के लिए कुछ कड़ी शर्तें रखी हैं। ईरान चाहता है कि लेबनान में युद्ध रुके और उसके फ्रीज किए गए पैसे वापस मिलें। इसके अलावा ईरान ने 10 पॉइंट्स का एक प्रस्ताव दिया है जिसमें अमेरिका की सेना का क्षेत्र से बाहर जाना और प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना शामिल है। दूसरी तरफ, अमेरिका ने साफ कर दिया है कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन उसके लिए ‘रेड लाइन’ है और उसे Strait of Hormuz से सुरक्षित रास्ता चाहिए।
बातचीत में कौन-कौन शामिल है?
इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में दोनों देशों और मेजबान पाकिस्तान के बड़े नेता और अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। विवरण नीचे दी गई टेबल में है:
| देश | प्रमुख प्रतिनिधि/नेता |
|---|---|
| अमेरिका (US) | JD Vance, Steve Witkoff, Jared Kushner, डोनाल्ड ट्रंप |
| ईरान (Iran) | Mohammad Bagher Ghalibaf, Abbas Araghchi, Ali Akbar Ahmadian, Abdolnaser Hemmati, Masoud Pezeshkian, Mohammad Reza Aref |
| पाकिस्तान (Pakistan) | Shehbaz Sharif, Ishaq Dar, Mohsin Raza Naqvi, Asim Munir |
अगर बातचीत नाकाम रही तो क्या होगा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर यह समझौता टूटता है, तो अमेरिका फिर से सैन्य हमले शुरू कर सकता है। वहीं ईरान के प्रतिनिधि मोहम्मद रजा आरिफ ने कहा कि डील तभी संभव है जब अमेरिका ‘अमेरिका फर्स्ट’ की सोच के साथ बातचीत करे। मौजूदा हालात तब और मुश्किल हो रहे हैं क्योंकि लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में इसराइल के हमले अब भी जारी हैं, जिससे शांति प्रयासों को बड़ा खतरा हो सकता है।




