अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई लंबी बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई. इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी करने का ऐलान किया है. इस तनाव की वजह से दोनों देशों के बीच चल रहा युद्धविराम अब खतरे में पड़ गया है.

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बातचीत क्यों नहीं बनी और अमेरिका की क्या शर्तें थीं?

21 घंटे तक चली इस हाई-लेवल मीटिंग में अमेरिका ने ईरान के सामने कुछ कड़ी शर्तें रखी थीं. US वाइस प्रेसिडेंट JD Vance ने बताया कि अमेरिका चाहता था कि ईरान यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने परमाणु केंद्रों को खत्म करे. इसके अलावा प्रॉक्सी ग्रुप्स को पैसा देना बंद करने और बिना टोल के हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की मांग भी की गई थी, जिसे ईरान ने नहीं माना. अमेरिका ने इसे अपना आखिरी और सबसे अच्छा ऑफर बताया था.

ईरान ने ट्रंप की धमकी पर क्या जवाब दिया?

ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने साफ कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की धमकियों का ईरानी देश पर कोई असर नहीं होगा. उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा और पिछले अनुभवों की वजह से उन पर यकीन करना मुश्किल है. वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी उनके नियंत्रण में है और किसी भी अमेरिकी सैन्य जहाज का सामना सख्ती से किया जाएगा.

विवाद और घटनाक्रम की पूरी जानकारी

विवरण जानकारी
तारीख 12 अप्रैल 2026
बैठक की जगह इस्लामाबाद, पाकिस्तान
मुख्य अमेरिकी नेता डोनाल्ड ट्रंप और JD Vance
मुख्य ईरानी नेता मोहम्मद बागर गालिबाफ
मुख्य विवाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी
युद्धविराम की समय सीमा 22 अप्रैल 2026
ईरान की स्थिति अमेरिकी धमकियों को खारिज किया