US-Iran Talks: इस्लामाबाद में भारी सुरक्षा, 10 हजार जवान तैनात, ईरान की शर्तों ने फंसाया पेंच
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत के लिए जबरदस्त तैयारी की गई है। शहर में 10 हजार पुलिस और सेना के जवान तैनात किए गए हैं ताकि सुरक्षा पुख्ता रहे। हालांकि, इस बीच ईरान ने बातचीत में शामिल होने पर संदेह जताया है, जिससे पूरी दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद पर टिकी हैं।
इस्लामाबाद में सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए हैं?
इस बैठक के लिए पूरे इस्लामाबाद को रेड अलर्ट पर रखा गया है और रेड जोन को पूरी तरह सील कर दिया गया है। आम लोगों की आवाजाही कम करने के लिए 9 और 10 अप्रैल को सरकारी छुट्टी घोषित की गई थी। सुरक्षा के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
- करीब 10,000 पुलिस, पैरामिलिट्री और सैन्य जवान तैनात किए गए हैं।
- पाकिस्तान एयर फोर्स ने IL-78 रिफ्यूलिंग टैंकर और C-130 विमान तैनात किए हैं।
- अमेरिकी सीक्रेट सर्विस और CIA की टीम C-130 विमान से इस्लामाबाद पहुंच चुकी है।
- प्रतिनिधियों और पत्रकारों के लिए वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा दी गई है।
ईरान और अमेरिका के बीच मुख्य विवाद क्या है?
ईरान ने बातचीत के लिए कुछ कड़ी शर्तें रखी हैं। ईरान का कहना है कि जब तक लेबनान में युद्धविराम नहीं होगा और उसके ब्लॉक किए गए पैसे वापस नहीं मिलेंगे, तब तक बातचीत नहीं होगी। वहीं अमेरिका की स्थिति और बैठक का विवरण नीचे दिया गया है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अमेरिकी टीम का नेतृत्व | उपराष्ट्रपति JD Vance |
| ईरानी मुख्य शर्त | लेबनान में युद्धविराम और संपत्ति की वापसी |
| बैठक का स्थान | सेरेना होटल, इस्लामाबाद |
| बातचीत का तरीका | इनडायरेक्ट (प्रॉक्सिमिटी टॉक्स) |
| समय सीमा | 10-11 अप्रैल से शुरू, 15 दिन तक चल सकती है |
| मध्यस्थ देश | पाकिस्तान |
ताजा अपडेट और मौजूदा स्थिति क्या है?
ताजा खबरों के मुताबिक, ईरानी सरकारी मीडिया ने अपनी टीम के इस्लामाबाद पहुंचने की खबरों को गलत बताया है। ईरान ने साफ किया है कि लेबनान में इजरायली हमलों के कारण बातचीत फिलहाल रुकी हुई है। दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति समझौते पर उम्मीद जताई है, लेकिन ईरान को चेतावनी भी दी है। अब अगले हफ्ते वाशिंगटन में लेबनान और इजराइल पर अलग से बैठक होने की संभावना है।




