अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों ने अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देश दोनों देशों को एक बैठक के लिए मनाने का दबाव डाल रहे हैं। राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले हमलों को फिलहाल 6 अप्रैल 2026 तक के लिए टाल दिया है। हालांकि युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है, लेकिन कूटनीतिक रास्तों से शांति का रास्ता निकालने का प्रयास जारी है।

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अमेरिका का शांति प्रस्ताव और मुख्य घटनाक्रम

अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को एक 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा है जिसमें विवाद सुलझाने के लिए मुख्य बिंदु रखे गए हैं। राष्ट्रपति Trump के अनुसार ईरान समझौता करने के लिए बातचीत के संकेत दे रहा है। इस बीच कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रम इस प्रकार रहे हैं:

  • हमलों पर रोक: राष्ट्रपति Trump ने ईरान पर हमलों की समय सीमा को बढ़ाकर 6 अप्रैल 2026 रात 8 बजे तक कर दिया है।
  • शांति प्रस्ताव: अमेरिकी दूत Steve Witkoff ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान के जरिए ईरान को एक्शन प्लान सौंपा गया है।
  • ईरान का कदम: सद्भावना के तौर पर ईरान ने 10 तेल टैंकरों को अपनी समुद्री सीमा से निकलने का रास्ता दिया है।
  • इजरायली हमले: बातचीत की खबरों के बीच इजरायल ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमले किए हैं जिसमें एक वरिष्ठ कमांडर की मौत हुई है।

मध्यस्थ देशों की भूमिका और ईरान की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने स्पष्ट किया है कि वे दोनों देशों के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इस मध्यस्थता में तुर्की और मिस्र भी शामिल हैं जो चाहते हैं कि क्षेत्र में स्थिरता आए। ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने अमेरिकी प्रस्ताव को पढ़ा है लेकिन उसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका का यह प्रस्ताव एकतरफा है और केवल उनके ही हितों की रक्षा करता है। हालांकि ईरान ने यह भी साफ किया है कि उन्होंने बातचीत के दरवाजे अभी पूरी तरह बंद नहीं किए हैं।

मुख्य पक्ष भूमिका/स्थिति
United States 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेजा और हमलों पर अस्थायी रोक लगाई
Iran प्रस्ताव को एकतरफा बताया लेकिन कूटनीति के लिए तैयार
Pakistan मुख्य मध्यस्थ के रूप में संदेशों का आदान-प्रदान कर रहा है
Israel ईरानी ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई जारी रखी है

खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और विशेषकर भारतीयों के लिए यह स्थिति काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी बड़े टकराव का असर तेल की कीमतों और उड़ानों पर पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें 6 अप्रैल की समय सीमा पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश सीधी बातचीत के लिए तैयार होते हैं या नहीं।