US Iran War: अमेरिका ने 2 दिन में इस्तेमाल किए 5 अरब डॉलर के हथियार, सऊदी अरब में भी गिरे ड्रोन
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में भारी तबाही देखने को मिल रही है। CNN और पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ने युद्ध के पहले 48 घंटों में ही 5.6 अरब डॉलर (करीब 5 बिलियन से ज्यादा) के हथियार और गोला-बारूद का इस्तेमाल कर लिया है। इस युद्ध का असर अब खाड़ी देशों, कच्चे तेल के बाजार और गैस सप्लाई पर भी साफ नजर आने लगा है।
युद्ध में हो रहे खर्च और नुकसान के आंकड़े
इस सैन्य अभियान को Operation Epic Fury का नाम दिया गया है। युद्ध में अमेरिका की तरफ से बड़े पैमाने पर पैसा और हथियार खर्च हो रहा है। इसके आंकड़े कुछ इस प्रकार हैं:
- पहले दो दिन में अमेरिका ने 5.6 अरब डॉलर के हथियार इस्तेमाल किए।
- अमेरिका का इस युद्ध में प्रतिदिन का खर्च करीब 891.4 मिलियन डॉलर आ रहा है।
- शुरुआती हफ्ते में कतर के रडार और फाइटर जेट सहित 2 अरब डॉलर के सैन्य उपकरणों का नुकसान हुआ है।
- पेंटागन हथियारों की भरपाई के लिए 50 अरब डॉलर का नया फंड मांगने की तैयारी में है।
हथियारों की खपत को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रक्षा कंपनियों को उत्पादन तेज करने का आदेश दिया है। व्हाइट हाउस ने बोइंग और लॉकहीड मार्टिन जैसी बड़ी कंपनियों के साथ बैठक कर हथियारों का स्टॉक बनाए रखने को कहा है।
सऊदी अरब पर असर और कच्चे तेल की स्थिति
इस तनाव का सीधा असर पूरे खाड़ी क्षेत्र पर पड़ रहा है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने 10 मार्च 2026 को पूर्वी इलाके में तेल उत्पादक क्षेत्रों के पास दो ड्रोन को मार गिराने की पुष्टि की है। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह इस क्षेत्र से तेल का निर्यात रोक देगा।
ईरान की इस चेतावनी के बाद सऊदी अरामको ने अपने तेल टैंकरों का रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य से बदलकर लाल सागर की तरफ कर दिया है। युद्ध की वजह से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। हालांकि अमेरिका के कुछ लक्ष्यों को पूरा करने के संकेत के बाद तेल की कीमतों में हल्की नरमी आई है।
भारत और प्रवासियों पर क्या होगा प्रभाव
खाड़ी में युद्ध लंबा खिंचने से दक्षिण एशिया, खासकर भारत में LPG गैस की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कमर्शियल गैस की कमी के कारण आने वाले दिनों में रेस्तरां और होटलों के संचालन में परेशानी आ सकती है।
इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए भी यह ध्यान देने वाली बात है। तेल कंपनियों के कामकाज और शिपिंग रूट में बदलाव से कमर्शियल गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। ड्रोन हमलों के कारण स्थानीय प्रशासन अलर्ट पर है और सुरक्षा बढ़ा दी गई है।




