US-Iran War Impact: ईरान युद्ध के कारण दुनियाभर में खाने-पीने का सामान होगा महंगा, कच्चे तेल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे
Al Jazeera English की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले का सीधा असर अब आम आदमी की रसोई पर पड़ने वाला है। कच्चे तेल की कीमतों और खाने-पीने के सामान के दामों में गहरा संबंध होता है। ऊर्जा महंगी होने से खेती से लेकर ट्रांसपोर्ट तक का खर्च बढ़ जाता है, जिससे खाने की चीजें महंगी हो जाती हैं। सोमवार को कच्चे तेल की कीमत 119.50 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, हालांकि बाद में तनाव कम होने के संकेतों के बीच इसमें थोड़ी गिरावट दर्ज की गई।
तेल की बढ़ती कीमतों का खाने पर कैसे पड़ेगा असर
जब कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तो पेट्रोल और डीजल भी महंगे हो जाते हैं। इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई पर पड़ता है। फल, सब्जियां, कुकिंग ऑयल, सीफूड और कॉफी जैसी चीजें खेतों से बाजार तक लाने में ज्यादा खर्च आता है। इसके अलावा, Strait of Hormuz ब्लॉक होने से खाद (Fertilizers) का एक्सपोर्ट काफी हद तक रुक गया है। इस रास्ते से दुनिया भर का 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) गुजरती है। खाद और ट्रांसपोर्ट महंगा होने से किसानों की लागत बढ़ रही है, जिसका पूरा बोझ बाजार में आम खरीदार पर पड़ेगा।
दुनिया भर में महंगाई और खाद्य संकट का खतरा
World Food Programme (WFP) ने चेतावनी दी है कि ईंधन के बढ़ते दाम और सप्लाई चेन टूटने से दुनिया भर में लाखों लोग गंभीर खाद्य संकट का सामना करेंगे। इसका सबसे ज्यादा असर यमन और गाजा जैसे कमजोर इलाकों पर पड़ेगा। UNCTAD की रिपोर्ट के अनुसार माल ढुलाई और इंश्योरेंस का खर्च बढ़ने से विकासशील देशों में रहने वाले लोगों के लिए घर का बजट संभालना मुश्किल हो जाएगा। खाड़ी देशों (Gulf countries) में रहने वाले भारतीय प्रवासियों (Expats) पर भी इस महंगाई का असर पड़ सकता है क्योंकि यहां ज्यादातर खाने-पीने का सामान बाहर से आयात (Import) होता है, जिसके कारण बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं।
नेताओं और विशेषज्ञों का क्या है बयान
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया है कि यह युद्ध लगभग पूरा हो चुका है और जल्द ही खत्म हो सकता है। उन्होंने अभी की महंगाई को थोड़े समय की दिक्कत बताया है और कहा है कि लंबे समय में ऊर्जा सुरक्षा से परिवारों को फायदा होगा। दूसरी तरफ, ब्रिटेन की चांसलर रशेल रीव्स ने बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए इंटरनेशनल ऑयल रिजर्व से तेल बाजार में उतारने का समर्थन किया है। मंगलवार सुबह ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम गिरकर 88 से 94 डॉलर और WTI के दाम 83 से 90 डॉलर के बीच आ गए हैं।




