अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। व्हाइट हाउस के अधिकारी केविन हैसेट ने बताया है कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में अमेरिका अब तक 12 बिलियन डॉलर खर्च कर चुका है। यह आंकड़ा उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान साझा किया। इसके साथ ही इस युद्ध का असर कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों पर भी साफ देखने को मिल रहा है।

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युद्ध का खर्च और अब तक की स्थिति

व्हाइट हाउस नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के डायरेक्टर केविन हैसेट ने बताया कि सेना वर्तमान में पहले से मौजूद हथियारों का इस्तेमाल कर रही है। इसलिए अभी तक संसद से अतिरिक्त फंड की मांग नहीं की गई है। पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के शुरुआती 6 दिनों में ही 11.3 बिलियन डॉलर खर्च हो गए थे।

यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को इजरायल के साथ मिलकर शुरू किया गया था। शुरुआत में अधिकारियों ने अनुमान लगाया था कि यह मिशन 4 से 6 हफ्ते तक चलेगा। अभी यह युद्ध अपने तीसरे हफ्ते में है और अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ऑपरेशन तय समय से आगे चल रहा है।

  • कुल खर्च: अब तक 12 बिलियन डॉलर
  • शुरुआती 48 घंटे: हथियारों पर 5.6 बिलियन डॉलर खर्च हुए
  • रोजाना का खर्च: युद्ध लंबा खिंचने पर यह 1 बिलियन डॉलर प्रतिदिन तक जा सकता है

कुवैत और खाड़ी देशों पर असर

इस युद्ध का असर मिडिल ईस्ट के अन्य देशों पर भी पड़ रहा है। युद्ध के दौरान कुवैत में मौजूद सैन्य ठिकानों पर ईरान की तरफ से ड्रोन हमले की खबरें भी सामने आई हैं। इससे इलाके में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है।

इसके अलावा ग्लोबल मार्केट में एनर्जी और फ्यूल की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। अमेरिका जेट फ्यूल और फर्टिलाइजर की कमी को दूर करने के लिए विदेशी जहाजों के परमिट बढ़ा रहा है। व्हाइट हाउस का मानना है कि युद्ध खत्म होने के बाद ग्लोबल इकोनॉमी में सुधार देखने को मिलेगा, लेकिन फिलहाल एनर्जी मार्केट में अस्थायी तौर पर दबाव बना हुआ है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.