अमेरिका और इसराइल का ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला, तेहरान के तेल डिपो और रिफाइनरी तबाह
अमेरिका और इसराइल के बीच ईरान के साथ चल रहे युद्ध के 11वें दिन यानी 10 मार्च 2026 को हमलों में बड़ी तेजी देखी गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने घोषणा की कि यह दिन ईरान के अंदर अब तक का सबसे भीषण हमला रहा। तेहरान शहर के कई इलाकों में रात भर भारी बमबारी हुई जिससे वहां का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। इन हमलों में बड़ी संख्या में लड़ाकू विमानों और बमवर्षकों का इस्तेमाल किया गया है जो 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से सबसे ज्यादा है।
युद्ध में अब तक कितना नुकसान हुआ
ईरान में हुए इन हमलों से जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। सरकारी आंकड़ों और रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक 1,230 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 12,000 से अधिक लोग घायल हैं। ईरान का दावा है कि मरने वालों में 200 बच्चे भी शामिल हैं। खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि बहरीन में एक नागरिक और सऊदी अरब में दो विदेशी कामगारों की मौत की खबर मिली है।
| स्थान | मरने वालों की संख्या | घायलों की संख्या |
|---|---|---|
| ईरान | 1,230 से अधिक | 12,000+ |
| लेबनान | 397 | ज्ञात नहीं |
| इसराइल | 11 | ज्ञात नहीं |
| अमेरिका (Pentagon रिपोर्ट) | 0 | 140 घायल |
किन जगहों को बनाया गया निशाना
अमेरिकी और इसराइली सेना ने तेहरान के महत्वपूर्ण ठिकानों को अपना निशाना बनाया है। इसमें मुख्य रूप से तेल भंडार और रिफाइनरी शामिल हैं।
- Risalat Square: तेहरान के इस इलाके में भारी बमबारी की गई।
- तेल भंडार: Aghdasieh तेल डिपो और तेहरान रिफाइनरी पर सीधे हमले किए गए।
- शिक्षा संस्थान: Minab के पास एक स्कूल और मध्य ईरान के Dr. Hafez Khomeyni स्कूल पर मिसाइल हमले की खबरें हैं।
- अस्पताल: ईरान के 11 अस्पताल इन हमलों से प्रभावित हुए हैं जिनमें से 3 पूरी तरह बंद हो गए हैं।
दोनों देशों के नेताओं का क्या कहना है
इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि उनकी सेना ईरान सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए हमले जारी रखेगी। वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि उनकी रक्षा प्रणाली पूरी तरह तैयार है और राजधानी पर हमलों से उनकी लड़ने की ताकत कम नहीं होगी। अमेरिका का कहना है कि उनका मुख्य मकसद ईरान के मिसाइल और ड्रोन बनाने वाले केंद्रों को खत्म करना है ताकि वे परमाणु हथियार न बना सकें। इस बीच खाड़ी देशों के समुद्र में जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है जिससे व्यापार पर बुरा असर पड़ने की संभावना है।




