ईरान और अमेरिका युद्ध के 38 दिन पूरे, ट्रंप ने दी बिजली घरों पर हमले की धमकी, 110 डॉलर के पार हुआ तेल का भाव.
अमेरिका और इसराइल की ईरान के साथ चल रही जंग अब बेहद गंभीर मोड़ पर आ गई है। इस युद्ध को आज 38 दिन पूरे हो चुके हैं और तनाव कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए मंगलवार, 7 अप्रैल की रात 8 बजे तक का समय दिया है। इस खबर के आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासियों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि युद्ध का सीधा असर तेल की कीमतों और सुरक्षा पर पड़ रहा है।
ट्रंप की चेतावनी और ईरान का कड़ा रुख क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को साफ चेतावनी दी है कि अगर वह तय समय तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोलता है, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट और पुलों पर हमला करेगा। ट्रंप ने 7 अप्रैल को ‘पावर प्लांट डे’ और ‘ब्रिज डे’ का नाम दिया है। इसके जवाब में ईरान की सेना ने कहा है कि अगर उनके नागरिक ठिकानों पर हमला हुआ तो वे इसका बहुत भयानक बदला लेंगे। ईरान ने पहले भी कुवैत और यूएई जैसे देशों में आर्थिक हितों को निशाना बनाने की बात कही है। खाड़ी में काम करने वाले भारतीयों के लिए स्थिति संवेदनशील बनी हुई है क्योंकि ईरान ने दुश्मन देशों के लिए इस समुद्री रास्ते को बंद कर रखा है।
पिछले 24 घंटों के दौरान युद्ध में क्या हुआ?
युद्ध के मैदान और कूटनीति के स्तर पर कई बड़े बदलाव देखे गए हैं। नीचे दी गई जानकारी से आप समझ सकते हैं कि हालात कितने बिगड़ चुके हैं:
| तारीख और समय | प्रमुख घटना |
|---|---|
| 5 अप्रैल 2026 | ट्रंप ने ईरान के लिए मोहलत को 7 अप्रैल तक बढ़ाया। |
| 5 अप्रैल 2026 | ईरान के अंदर गिरे एक अमेरिकी F-15E के पायलट को बचा लिया गया। |
| 6 अप्रैल 2026 | ईरान की सेना ने नागरिक ठिकानों पर हमले की सूरत में बड़ी जवाबी कार्रवाई की धमकी दी। |
| 6 अप्रैल 2026 | इसराइल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले तेज करने का फैसला किया। |
| बाजार अपडेट | युद्ध के कारण तेल के दाम 110 डॉलर के ऊपर पहुंचे। |
ईरान का कहना है कि अगर उसे युद्ध के नुकसान का मुआवजा मिलता है, तो वह समुद्री रास्ते को खोलने पर विचार कर सकता है। ओमान और ईरान के बीच इस रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए बातचीत भी चल रही है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें 7 अप्रैल की डेडलाइन पर टिकी हैं क्योंकि इसके बाद युद्ध और भी खतरनाक रूप ले सकता है।




