US-Israel Iran War Update: ईरान के साथ जंग का चौथा हफ्ता शुरू, खाड़ी देशों पर भी गिरे रॉकेट और ड्रोन
अमेरिका और इजराइल की ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई अब चौथे हफ्ते में प्रवेश कर गई है। 21 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार इस भीषण युद्ध में ईरान के भीतर 1,400 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। ईरान ने भी पलटवार करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में मौजूद सैन्य और नागरिक ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।
इस युद्ध के मुख्य अपडेट और अब तक का घटनाक्रम क्या है?
यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों को खत्म करने के लिए बड़े हमले किए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इसे अमेरिकी लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है ताकि तेहरान कभी परमाणु हथियार न बना सके। इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इसे ‘Operation Lion’s Roar’ का नाम दिया है जिसका मकसद क्षेत्र की तस्वीर बदलना है। युद्ध की शुरुआत में ही ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई थी।
खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर इसका क्या असर हुआ?
ईरान ने अपनी सुरक्षा और जवाबी कार्रवाई के लिए खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सभी छह देशों को निशाना बनाया है। सऊदी अरब ने 21 मार्च को ही अपने पूर्वी क्षेत्र में 5 ड्रोन मार गिराए हैं जबकि कुवैत भी लगातार हवाई हमलों को रोक रहा है। ईरान के नेताओं ने संकेत दिए हैं कि युद्ध खत्म होने के बाद भी Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को रोका जाएगा जिससे पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
युद्ध से जुड़ी कुछ प्रमुख जानकारियां नीचे दी गई तालिका में देखी जा सकती हैं:
| विवरण | संख्या / जानकारी |
|---|---|
| ईरान में कुल मौतें | 1,400 से अधिक |
| कुल मौतों का कुल आंकड़ा | 1,800 से अधिक |
| मारे गए अमेरिकी सैनिक | 8 |
| प्रभावित क्षेत्र | ईरान, इराक, इजराइल और सभी GCC देश |
| युद्ध की शुरुआत | 28 फरवरी 2026 |
इराक में भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि वहां अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले हुए हैं। अमेरिका अब ईरान के परमाणु भंडार को जब्त करने और क्षेत्र में जमीनी सेना भेजने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। ब्रिटेन भी इस मामले में रक्षात्मक भूमिका निभा रहा है और उसने जॉर्डन और कतर जैसे देशों में मिसाइलों को रोकने के लिए अपने विमान तैनात किए हैं।




