अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध पर बड़ा अपडेट, ट्रंप ने 5 दिनों के लिए टाले हमले, ईरान ने बातचीत की खबरों को नकारा
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान किया है। ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट और ऊर्जा केंद्रों पर होने वाले सैन्य हमलों को 5 दिनों के लिए टालने का फैसला किया है। ट्रंप का कहना है कि यह फैसला ईरानी अधिकारियों के साथ हुई सकारात्मक बातचीत के बाद लिया गया है। हालांकि, दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत की खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और युद्ध की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
ट्रंप का दावा और ईरान का आधिकारिक रुख क्या है?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे मिडिल ईस्ट में जारी दुश्मनी का पूरा समाधान चाहते हैं, जिसके लिए उन्होंने बातचीत का रास्ता अपनाया है। लेकिन ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्रालय ने इन दावों को पूरी तरह झूठ बताया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ न तो सीधे और न ही किसी दूसरे माध्यम से कोई चर्चा हुई है। ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप के बयान को तेल बाजार और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली एक चाल बताया है।
युद्ध के मैदान में पिछले 24 घंटों में क्या हुआ?
भले ही ट्रंप ने हमले टालने की बात कही है, लेकिन जमीन पर जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। 24 मार्च 2026 को क्षेत्र में कई बड़ी सैन्य गतिविधियां दर्ज की गई हैं।
| मुख्य घटना | विवरण |
|---|---|
| ट्रंप का फैसला | ईरान के पावर प्लांट्स पर हमले 5 दिन के लिए टाले |
| ईरान का पलटवार | इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ शुरू किया |
| इजरायल की कार्रवाई | तेहरान और बेरूत में कई इलाकों पर हवाई हमले किए |
| UAE की रक्षा | ईरान से आ रही 7 बैलिस्टिक मिसाइलें और 16 ड्रोन मार गिराए |
| सऊदी अरब | पूर्वी क्षेत्र में घुस रहे 8 ड्रोनों को नष्ट किया |
| मानवीय नुकसान | लेबनान में अब तक 1,039 लोगों की मौत हुई |
क्षेत्रीय देशों और आम जनता पर युद्ध का प्रभाव
इस संघर्ष का असर अब केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी देशों पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणालियों को लगातार ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को रोकना पड़ रहा है। UNICEF के आंकड़ों के मुताबिक, 28 फरवरी से अब तक ईरान और लेबनान में 324 से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। ईरान और लेबनान में करीब 40 लाख से ज्यादा लोग अपना घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भटक रहे हैं।




