अमेरिका ने ईरान के 7000 ठिकानों पर किया हमला, 5000 पाउंड के बमों से भूमिगत ठिकानों को बनाया निशाना
पेंटागन ने गुरुवार को जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान के 7,000 से अधिक ठिकानों पर हमला किया है। इस सैन्य कार्रवाई में अमेरिकी सेना ने 5,000 पाउंड के पेनिट्रेटर हथियारों का उपयोग किया है, जो ज़मीन के नीचे बने गहरे ठिकानों को नष्ट करने में सक्षम हैं। यह हमला ईरान के सैन्य ढांचे और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाकर किया गया है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में जारी इस तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना है, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों पर भी असर हो सकता है।
अमेरिकी सेना के हमले में किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
जनरल डैन केन के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान के उन भूमिगत ठिकानों को निशाना बनाया है जहाँ मिसाइलें और नौसैनिक गोला-बारूद रखा गया था। हमलों में ईरान के 120 से अधिक जहाज़ों और 44 माइनलेयर्स को भी नष्ट किया गया है। इसके अलावा, ईरान के हवाई क्षेत्र में घुसकर उन ठिकानों पर भी बमबारी की गई जहाँ से हमले के ड्रोन संचालित किए जा रहे थे। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास स्थित ईरान के मजबूत मिसाइल केंद्रों पर 5,000 पाउंड के GBU-72 पेनिट्रेटर बमों का इस्तेमाल किया गया है, जो काफी गहराई तक मार करते हैं।
ईरान की सैन्य क्षमता पर हमले का क्या प्रभाव पड़ा?
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि इन हमलों से ईरान की जवाबी कार्रवाई करने की शक्ति काफी कम हो गई है। सैन्य नुकसान की जानकारी नीचे दी गई है:
- बैलिस्टिक मिसाइल: ईरान की नई मिसाइल बनाने की क्षमता को भारी नुकसान पहुँचा है और अमेरिकी बलों पर हमलों में 90 प्रतिशत की कमी आई है।
- नौसेना: ईरान के सैन्य बंदरगाह पूरी तरह से ठप हो गए हैं और उनकी 11 पनडुब्बियां अब काम करने की स्थिति में नहीं हैं।
- परमाणु कार्यक्रम: नेशनल इंटेलिजेंस की निदेशक तुलसी गबार्ड ने बताया कि हमलों ने ईरान के परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुँचाया है।
- वायु रक्षा: ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है जिससे अमेरिकी विमानों को कार्रवाई में आसानी हुई है।




