US Central Command Action: अमेरिका ने ईरान में 9,000 ठिकानों को किया ध्वस्त, ‘Operation Epic Fury’ के तहत बड़ी कार्रवाई
US Central Command (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि ईरान के खिलाफ ‘Operation Epic Fury’ के तहत बड़ी सैन्य कार्रवाई की गई है। 24 मार्च 2026 तक अमेरिका ने ईरान में 9,000 से भी ज़्यादा ठिकानों को हवाई हमलों में निशाना बनाया है। इस अभियान में ईरान के समुद्री जहाज़ों और मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को भारी नुकसान पहुँचाया गया है। यह ऑपरेशन 28 फरवरी 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश पर शुरू हुआ था।
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ईरान में किन संपत्तियों को पहुँचाया गया नुकसान?
अमेरिकी सेना ने इस ऑपरेशन के दौरान ईरान के अलग-अलग सैन्य हिस्सों पर हमले किए हैं। इस कार्रवाई में ईरान की युद्धक क्षमताओं को खत्म करने पर ध्यान दिया गया है। मुख्य डेटा नीचे दिया गया है:
| निशाने पर रहे ठिकाने | प्रकार |
|---|---|
| 140 से ज़्यादा नौसैनिक जहाज़ | ईरानी नेवी |
| मिसाइल और ड्रोन प्लांट | मैन्युफैक्चरिंग सेंटर |
| IRGC इंटेलिजेंस साइट्स | खुफिया ठिकाने |
| बैलिस्टिक मिसाइल भंडार | हथियार डिपो |
इन हमलों के लिए अमेरिका ने अपने सबसे आधुनिक फाइटर जेट्स जैसे F-35, F-22 और B-52 भारी बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल किया है। इसके साथ ही परमाणु शक्ति से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर को भी तैनात रखा गया है।
शांति वार्ता और ईरान की मौजूदा स्थिति क्या है?
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान की सैन्य ताकत अब पहले जैसी नहीं रही और उसके हमलों की फ्रीक्वेंसी में कमी आई है। एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, ईरान की तरफ से होने वाले ड्रोन हमलों की संख्या अब बहुत कम हो गई है। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि होर्मुज की खाड़ी को फिर से खोलने के लिए शांति वार्ता सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है।
इस पूरे ऑपरेशन का मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना और उसके मिसाइल भंडार को पूरी तरह खत्म करना है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, वे लगातार प्राथमिकता वाले ठिकानों की निगरानी कर रहे हैं और उन पर हमले जारी हैं। ईरान के कुछ ऊर्जा केंद्रों और गैस पाइपलाइनों पर भी हमले की खबरें आई हैं, लेकिन इनकी जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है।




