अमेरिका की सेना यानी US Central Command (CENTCOM) ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. Operation Epic Fury के तहत अमेरिका और इजराइल मिलकर ईरान के न्यूक्लियर और मिसाइल ठिकानों को निशाना बना रहे हैं.

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हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी 2026 से लेकर अब तक AI की मदद से 5000 से ज्यादा ठिकानों को तबाह किया जा चुका है. 11 मार्च को अमेरिका ने Strait of Hormuz के पास ईरान के 16 जहाजों को भी नष्ट कर दिया है.

AI कैसे कर रहा है सेना की मदद

अमेरिकी सेना Maven Smart System, Anthropic Claude AI और Anduril Industries की तकनीक का इस्तेमाल कर रही है. इन सिस्टम्स की मदद से सेना को हर घंटे 1000 से ज्यादा टारगेट की जानकारी मिल रही है.

CENTCOM के अधिकारियों के मुताबिक जो प्लानिंग करने में पहले हफ्तों का समय लगता था, वह अब चंद मिनटों में हो रहा है. AI की सटीकता से सेना व्यापारिक और सैन्य जहाजों के बीच आसानी से फर्क कर पा रही है.

इस तकनीक के इस्तेमाल से IRGC के मुख्यालयों और मिसाइल लॉन्च साइट्स को बहुत ही कम समय में बर्बाद किया जा रहा है. सेना के लिए यह काम अब इंसानी क्षमता से भी ज्यादा तेज हो गया है.

इंसानों के हाथ में ही है आखिरी फैसला

भले ही सेना बड़े पैमाने पर AI का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन किसी भी जगह पर बमबारी या मिसाइल दागने का आखिरी फैसला इंसान ही करता है. CENTCOM के प्रवक्ता ने साफ किया है कि AI सिर्फ एक टूल है जो जानकारी तेजी से देता है.

हर हमले से पहले अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन किया जाता है और एक सैन्य कमांडर की मंजूरी के बाद ही एक्शन लिया जाता है. इस तकनीक का असली फायदा सेना को स्पीड देना है ताकि दुश्मन को सोचने का मौका ना मिले.

इस बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद मुज्तबा खामेनेई को नया लीडर बनाया गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले पर अपनी नाखुशी जताई है.

सऊदी अरब और खाड़ी देशों पर असर

इस तनाव का सीधा असर खाड़ी देशों पर भी देखने को मिल रहा है. सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने 11 मार्च को जानकारी दी कि उन्होंने Prince Sultan Air Base की तरफ आ रही कई ईरानी मिसाइलों को हवा में ही रोक दिया है.

सऊदी अरब ने अपने कई घरेलू ठिकानों पर ड्रोन हमलों को भी पूरी तरह से नाकाम किया है. इस युद्ध और AI के इस्तेमाल को 2003 के इराक युद्ध से भी दोगुना बड़ा अभियान बताया जा रहा है.

खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों और कामगारों के लिए क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है. हालांकि सऊदी अरब और अन्य देश अपनी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से सतर्क हैं.

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com