Iran-US Conflict: अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी की, समंदर में उतारे 11 डिस्ट्रॉयर और एयरक्राफ्ट कैरियर
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए उसके बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है। इस फैसले से पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही रुक गई है। अमेरिकी नौसेना ने अपनी भारी ताकत समंदर में तैनात कर दी है। इस तनाव की वजह से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों के बीच चिंता बढ़ गई है क्योंकि इससे व्यापार और समुद्री यात्रा पर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी नौसेना ने कौन सी ताकत तैनात की है?
Pentagon ने पुष्टि की है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में युद्धपोत भेजे गए हैं। इसमें USS Abraham Lincoln एयरक्राफ्ट कैरियर और 11 डिस्ट्रॉयर शामिल हैं। इसके अलावा USS Tripoli ग्रुप के साथ लगभग 2,200 मरीन भी तैनात किए गए हैं।
| ताकत/जहाज | जानकारी |
|---|---|
| USS Abraham Lincoln | अरब सागर में तैनात |
| डिस्ट्रॉयर | 11 जहाज (Spruance, Michael Murphy आदि) |
| USS Tripoli ग्रुप | 2,200 मरीन के साथ तैनात |
| USS Gerald R. Ford | पूर्वी भूमध्य सागर में |
| USS George H.W. Bush | मध्य पूर्व में तैनात |
| USS Ross, Donald Cook, Mason | Arleigh Burke-class डिस्ट्रॉयर |
घेराबंदी क्यों हुई और अब क्या असर होगा?
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता नहीं हो पाया, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। President Donald Trump ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि जो जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने के लिए अवैध टोल देंगे, उन्हें सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा। यह घेराबंदी 13 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे से शुरू हो गई है।
- ईरान ने धमकी दी है कि अब क्षेत्र का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।
- UK के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने कहा कि ब्रिटेन इस घेराबंदी को लागू नहीं करेगा।
- USS Frank E. Peterson और USS Michael Murphy ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से माइन्स हटाने का काम किया।
- CENTCOM ने साफ किया कि यह घेराबंदी केवल ईरानी बंदरगाहों के लिए है, अन्य जहाजों के लिए रास्ता खुला रहेगा।





